विरासत से विकास तक, भारतीय ज्ञान परंपरा ही हमारी शक्ति: राजस्थान विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में Gen Z से रूबरू हुए कर्नल राज्यवर्धन राठौड़


 जयपुर: राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने मंगलवार को राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के राजस्थान अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘राजस्थान का लोक साहित्य, कला एवं इतिहास’ के उद्घाटन समारोह में युवाओं और Gen Z के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर अपने विचार साझा किए।

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषता उसकी निरंतर विकसित होती ज्ञान परंपरा है। भारत ने हर युग में समय के साथ कदम बढ़ाए हैं, लेकिन अपनी सभ्यतागत चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को कभी नहीं छोड़ा। साहित्य, लोककथाओं, लोकगीतों, कला और परंपराओं के माध्यम से एक पीढ़ी का अनुभव अगली पीढ़ी तक पहुंचता रहा है। यही हमारी सांस्कृतिक शक्ति और पहचान है।

राजस्थान की विविध लोक संस्कृतियों में समाहित है भारत की एकता का भाव

राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मारवाड़, मेवाड़, ढूंढाड़, हाड़ौती और शेखावाटी की अपनी विशिष्ट बोलियां, लोक परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान हैं, लेकिन इन सभी को जोड़ने वाला साझा भाव हमारी एकता है। राजस्थान की लोक संस्कृति केवल हमारी विरासत नहीं, बल्कि पीढ़ियों के अनुभव, ज्ञान और जीवन मूल्यों का अनमोल संग्रह है।

उन्होंने कहा कि लोक साहित्य, कला और इतिहास हमारी सांस्कृतिक चेतना के आधार हैं। इन्हें समझना, संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

विरासत का संरक्षण और आधुनिकता के साथ विकास ही भारत की असली ताकत

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में राजस्थान सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के भारत की संस्कृति को 'Timeless' बताए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी परंपराओं का महत्व केवल उनके प्राचीन होने में नहीं है, बल्कि इस बात में है कि वे आज भी हमें जीवन जीने, समाज को जोड़ने और भविष्य की दिशा तय करने की प्रेरणा देती हैं।

राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण व्यवस्थाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हमारे पूर्वजों ने जोहड़, बावड़ियां, तालाब और कुंड बनाकर प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित किया। यह हमारी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और दूरदर्शिता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

आधुनिक तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय में युवाओं की अहम भूमिका

युवाओं को संबोधित करते हुए कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि आज भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे आधुनिक तकनीक को अपनाने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और भारतीय ज्ञान परंपरा से भी जुड़े रहें।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से भारतीय भाषाओं, लोक साहित्य, कला और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं। हमें अपनी विरासत पर गर्व करते हुए नवाचार, शोध और तकनीकी विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया को केवल तकनीक और नवाचार ही नहीं, बल्कि विविधताओं के बीच एकता, प्रकृति के साथ संतुलन, परिवार एवं समुदाय की शक्ति, कर्तव्य और सह-अस्तित्व की जीवन दृष्टि भी प्रदान करता है।

Gen Z के लिए संदेश: अपनी जड़ों से जुड़ें और भविष्य की तकनीक को अपनाएं

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का युवाओं के लिए संदेश स्पष्ट था कि अपनी विरासत पर गर्व करें, भारतीय ज्ञान परंपरा को समझें और आधुनिक तकनीक के साथ स्वयं को निरंतर विकसित करें। परंपरा और प्रगति का यह समन्वय ही विकसित भारत के निर्माण का मजबूत आधार बनेगा।

गणमान्यजनों की रही गरिमामयी उपस्थिति

इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में आदरणीय श्री बाबूलाल जी, प्रांत प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ; आदरणीय प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत जी, कुलगुरु, राजस्थान विश्वविद्यालय; श्री जितेन्द्र कुमार सोनी जी, सचिव, मुख्यमंत्री शासन सचिवालय, राजस्थान सरकार; डॉ. दीपिका विजयवर्गीय जी, निदेशक, राजस्थान अध्ययन केंद्र सहित अन्य गणमान्यजन, शिक्षाविद् और युवा साथी उपस्थित रहे।

यह आयोजन राजस्थान की लोक संस्कृति, साहित्य, कला और इतिहास को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।

परंपरा हमारी पहचान है, तकनीक हमारी ताकत है और युवा भारत का भविष्य हैं। विरासत से विकास तक की यह यात्रा ही नए भारत की वास्तविक शक्ति है।

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