कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ — हर मीटिंग के लिए कॉन्फ्रेंस रूम जरूरी नहीं
राजनीति में एक नाम जो अनुशासन, सादगी और जमीनी जुड़ाव का पर्याय बन चुका है — कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ । ओलंपिक रजत पदक विजेता, पूर्व सैन्य अधिकारी, और जयपुर ग्रामीण के सांसद — यह व्यक्तित्व हर भूमिका में एक ही सिद्धांत पर चलता है: काम बातों से नहीं, मैदान में उतरकर होता है। जब नेता कॉन्फ्रेंस रूम छोड़कर मैदान में आता है आज की राजनीति में बैठकें होती हैं — बड़े हॉल में, एसी कमरों में, माइक और बैनरों के बीच। लेकिन कर्नल राठौड़ की बैठकें अलग होती हैं। वे किसान के खेत की मेड़ पर बैठकर बात करते हैं। वे युवाओं के साथ सुबह की दौड़ लगाते हुए उनकी समस्याएं सुनते हैं। वे एक स्कूल की टूटी दीवार के सामने खड़े होकर अधिकारियों को जवाबदेह बनाते हैं। यही उनकी असली कॉन्फ्रेंस रूम है — खुला आसमान, जमीन की धूल, और आम इंसान की आंखों में दिखती जरूरत। सेना ने सिखाया — नेतृत्व फाइलों में नहीं होता भारतीय सेना में बिताए वर्षों ने कर्नल राठौड़ को एक बुनियादी सबक दिया: नेता वही होता है जो सबसे आगे चलता है, सबसे पीछे नहीं बैठता। निशानेबाजी में 2004 के एथेंस ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले राठौड़ ने यह ...