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NTPC नेशनल रैंकिंग तीरंदाजी प्रतियोगिता 2026: जयपुर में गूंजा तीरों का जश्न

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  जयपुर के जगतपुरा शूटिंग रेंज पर आयोजित NTPC नेशनल रैंकिंग तीरंदाजी प्रतियोगिता 2026 ने देशभर के तीरंदाजों को एक मंच पर लाकर खेल प्रेमियों को रोमांच से भर दिया। 26 जुलाई 2026 को संपन्न हुई इस प्रतियोगिता में कंपाउंड और रिकर्व दोनों वर्गों में शानदार मुकाबले देखने को मिले। कंपाउंड पुरुष वर्ग: साहिल राजेश यादव ने लहराया परचम रेलवे के साहिल राजेश यादव ने पुरुषों की कंपाउंड स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर सबका दिल जीत लिया। दिल्ली के अमन सैनी को रजत और प्रियांश को कांस्य पदक मिला। राजस्थान के अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज रजत चौहान ने रैंकिंग राउंड में दूसरा स्थान हासिल करके उम्मीदें जगाई थीं, लेकिन राउंड ऑफ 16 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। कंपाउंड महिला वर्ग: वैदेही जाधव की शानदार जीत महाराष्ट्र की वैदेही जाधव ने महिला कंपाउंड वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दिल्ली की कुमुद सैनी रजत और महाराष्ट्र की धारा अमोल बिडकर कांस्य पदक लेकर गईं। इस वर्ग में राजस्थान की कोई खिलाड़ी पदक राउंड तक नहीं पहुंच सकी। रिकर्व पुरुष वर्ग: नीरज चौहान का दमदार प्रदर्शन ऑल इंडिया पुलिस के नीरज चौहान ...

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ – जगतपुरा की आर्चरी रेंज बनेगी देश का अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र

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  नमस्कार दोस्तों, राजस्थान में तीरंदाजी के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। जयपुर की विश्वस्तरीय आर्चरी रेंज को अब इंटरनेशनल आर्चरी एक्सीलेंस सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। यह बड़ी घोषणा कैबिनेट मंत्री एवं खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने प्रथम एनटीपीसी नेशनल रैंकिंग आर्चरी टूर्नामेंट के समापन समारोह में की। यह सेंटर भारतीय तीरंदाजी को एक नई दिशा देने का काम करेगा और ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप तथा एशियाई खेलों के लिए खिलाड़ियों को तैयार करेगा। जगतपुरा में बनेगा एक्सीलेंस सेंटर कर्नल राठौड़ ने बताया कि जगतपुरा स्थित शूटिंग रेंज आर्चरी अकादमी को देश का अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए राजस्थान सरकार और भारतीय तीरंदाजी संघ (Archery Association of India) के बीच जल्द एमओयू होगा। 75% खर्च उठाएगी राजस्थान सरकार इस परियोजना की कुल लागत में: 75% – राजस्थान सरकार वहन करेगी 25% – भारतीय तीरंदाजी संघ वहन करेगा यह सरकार की खेलों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है, जहाँ वह खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएँ देने के लिए बड़ा निवेश करने को तैयार है।...

जयपुर बनेगा तीरंदाजी का नया ग्लोबल हब: खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ की बड़ी घोषणा

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  जयपुर। जयपुर में आयोजित 'प्रथम एनटीपीसी नेशनल रैंकिंग तीरंदाजी टूर्नामेंट 2026' के सीनियर वर्ग के रोमांचक मुकाबलों के समापन के साथ ही भारतीय खेल जगत को एक बड़ी सौगात मिली है। राजस्थान सरकार के खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने जयपुर स्थित आर्चरी रेंज को विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी एक्सीलेंस सेंटर (International Archery Centre of Excellence) के रूप में विकसित करने की ऐतिहासिक घोषणा की है। 75:25 के अनुपात में होगा विकास कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि इस एक्सीलेंस सेंटर के निर्माण में लगने वाली कुल लागत का 75 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान सरकार और 25 प्रतिशत हिस्सा भारतीय तीरंदाजी संघ (AAI) वहन करेगा। उन्होंने कहा कि यह सेंटर भविष्य में ओलंपिक, एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप के लिए भारतीय तीरंदाजों को निखारने का मुख्य केंद्र बनेगा। सीनियर वर्ग का परिणाम: एक नज़र में टूर्नामेंट में देश भर के दिग्गजों ने अपने अचूक निशानों से पदक जीते: कंपाउंड पुरुष: स्वर्ण: साहिल राजेश जाधव (आरएसपीबी) रजत: अमन सैनी (दिल्ली) कांस्य: प्रियांश (दिल्ली) कंपाउंड महिला: स्वर्ण:...

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ की कलम से: ऋषिकान्त सिंह चनांबम — एक अविस्मरणीय प्रदर्शन 🇮🇳

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  राष्ट्रमंडल खेल 2026 का मंच एक बार फिर भारत के लिए गौरव का क्षण लेकर आया। इस बार जिस नाम ने पूरे देश का सीना चौड़ा किया, वह नाम है — ऋषिकान्त सिंह चनांबम । यह जीत केवल एक पदक की जीत नहीं है। यह उस अदम्य साहस, अथक परिश्रम और अटूट संकल्प की जीत है जो भारत के हर कोने में जीवित है। संघर्ष से शिखर तक ऋषिकान्त का सफर आसान नहीं था। छोटे शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाना — यह रास्ता पसीने, त्याग और अनुशासन से भरा हुआ था। लेकिन जो खिलाड़ी दबाव में भी अपनी शांति और एकाग्रता बनाए रखता है, उसे दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती। राष्ट्रमंडल खेल 2026 के मंच पर ऋषिकान्त ने जो संयम और दृढ़ता दिखाई, वह हर भारतीय युवा के लिए एक जीवंत प्रेरणा है। खेल भावना जो देश को जोड़ती है भारत एक विविधताओं से भरा देश है। मणिपुर की धरती से उठा यह सितारा आज पूरे राष्ट्र की आवाज बन गया है। यह खेल की वह शक्ति है जो भाषा, सीमा और जाति से परे जाकर एक करोड़ दिलों को एक धागे में पिरो देती है। परिश्रम सदा फल देता है कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ स्वयं एक ओलंपिक पदक विजेता और भारतीय खेलों के सशक्त ...

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ – कारगिल विजय दिवस पर झोटवाड़ा में 'मन की बात' का सामूहिक श्रवण

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  नमस्कार दोस्तों, 26 जुलाई – यह तारीख हर भारतीय के दिल में गर्व और सम्मान का भाव जगाती है। कारगिल विजय दिवस के इस पावन अवसर पर कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने झोटवाड़ा में एक विशेष आयोजन किया। उन्होंने बूथ क्रमांक 411, केसर नगर, गांधीपथ लालपुरा, झोटवाड़ा में गौरव सेनानियों , बूथ कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के साथ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें संस्करण का सामूहिक श्रवण किया। कारगिल विजय दिवस – बलिदान और गौरव का प्रतीक 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' के तहत कारगिल की चोटियों पर विजय प्राप्त की थी। इस युद्ध में 527 वीर सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन उनके बलिदान ने भारत की सीमाओं को सुरक्षित किया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी आजादी और सुरक्षा के लिए हमारे जवान किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करते। प्रधानमंत्री मोदी का 'मन की बात' – 136वां एपिसोड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा: "कारगिल विजय दिवस हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण ह...

कारगिल विजय दिवस: 'नाम, नमक और निशान' ही भारतीयता की सच्ची पहचान — कर्नल राज्यवर्धन राठौड़

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  जयपुर। 26 जुलाई, कारगिल विजय दिवस का वह ऐतिहासिक और गौरवशाली दिन है जो हर भारतीय के सीने को गर्व से चौड़ा कर देता है। इस अवसर पर राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित विशेष कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान कर्नल राठौड़ ने सैन्य परंपरा के सबसे पावन सूत्र 'नाम, नमक और निशान' के महत्व को देशवासियों के सामने साझा करते हुए कारगिल के अमर शहीदों को भावभरे श्रद्धापुष्प अर्पित किए। क्या है 'नाम, नमक और निशान' का अर्थ? कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने भारतीय सेना की कार्यप्रणाली और देशभक्ति के इस त्रिमूर्ति सिद्धांत को विस्तार से समझाते हुए कहा: "नाम, नमक और निशान... यही हमारी भारतीयता की असली पहचान हैं।" नाम: अपनी रेजीमेंट, अपने देश और अपनी मिट्टी का नाम, जिसे सैनिक कभी झुकने नहीं देता। नमक: देश के प्रति वफादारी और उस पावन धरती का कर्ज, जिसे वह अपने रक्त की अंतिम बूंद से चुकाता है। निशान: हमारा तिरंगा, हमारा राष्ट्रध्वज, जिसकी आन-बान और शान के लिए मां भारती का लाल ह...

कारगिल विजय दिवस: "ये दिल माँगे मोर" — एक सैनिक की पुकार, एक राष्ट्र का संकल्प

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  भारत माँ के वीर सपूत, शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा का वह अमर वाक्य — "ये दिल माँगे मोर" — आज भी हर भारतीय के हृदय में गूँजता है। कारगिल विजय दिवस के इस पावन अवसर पर, कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने इन शब्दों की गहराई को एक नए आयाम में प्रस्तुत किया है। "मोर" का अर्थ — सिर्फ युद्धभूमि नहीं, हर क्षेत्र में श्रेष्ठता कैप्टन बत्रा ने जब यह शब्द कहे थे, तब वे एक युद्धभूमि पर खड़े थे। लेकिन कर्नल राठौड़ का संदेश यह है कि "मोर" की यह पुकार केवल सैनिकों के लिए नहीं — यह हर भारतीय नागरिक के लिए है। विज्ञान में "मोर" — अनुसंधान और नवाचार में आगे बढ़ना खेल में "मोर" — ओलंपिक और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराना शिक्षा में "मोर" — विश्वस्तरीय ज्ञान और कौशल अर्जित करना उद्योग में "मोर" — आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान कारगिल — वह युद्ध जिसने भारत को परिभाषित किया 1999 का कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था — यह भारतीय संकल्पशक्ति की परीक्षा थी। हिमालय की बर्फीली चोटियों पर, जहाँ साँस लेना भी दुश्वार था, हम...