श्रद्धेय लक्ष्मणराव इनामदार जी की जयंती पर सादर नमन
समाज सेवा, सादगी, संगठन और सहयोग की भावना को अपने जीवन का आधार बनाने वाले श्रद्धेय लक्ष्मणराव माधवराव इनामदार जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।
लक्ष्मणराव इनामदार जी, जिन्हें स्नेह और सम्मान से ‘वकील साहेब’ के नाम से जाना जाता था, का जीवन राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा। उनका जन्म 21 सितंबर 1917 को महाराष्ट्र के खाटव में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने परिवार और समाज में सहयोग, जिम्मेदारी तथा सह-अस्तित्व के संस्कारों को अनुभव किया।
उनका जीवन इस विचार को दर्शाता है कि समाज की वास्तविक शक्ति आपसी सहयोग और संगठन में निहित होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2017 में लक्ष्मणराव इनामदार जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उनके योगदान को याद करते हुए कहा था कि सहकारिता का मूल सिद्धांत लोगों को एकजुट करना है और इनामदार जी ने इस भावना को अपने जीवन में आत्मसात किया था।
लक्ष्मणराव इनामदार जी ने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाया और सामाजिक तथा सहकारिता क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन से अनेक कार्यकर्ताओं ने समाज और सार्वजनिक जीवन में योगदान दिया। 2023 में आयोजित लक्ष्मणराव इनामदार स्मृति व्याख्यान में भी उनके संगठनात्मक मार्गदर्शन और सहकारिता के क्षेत्र में योगदान को रेखांकित किया गया।
आज उनकी जयंती हमें यह संदेश देती है कि सेवा केवल बड़े कार्यों तक सीमित नहीं होती। समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना, जरूरतमंदों की सहायता करना, लोगों को साथ लेकर चलना और सामूहिक प्रगति के लिए कार्य करना ही सच्ची सामाजिक जिम्मेदारी है।
उनके जीवन से सादगी, सेवा, सहयोग और संगठन जैसे मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है। यही मूल्य समाज को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की भावना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
श्रद्धेय लक्ष्मणराव इनामदार जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उनका जीवन और विचार आने वाली पीढ़ियों को समाज सेवा, सहयोग और समर्पण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहें।
सेवा, सहयोग और संगठन की भावना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
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