राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: "यह शब्दों की नहीं, धागों की कहानी है" — कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
जयपुर (निमेडा)। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के शुभ अवसर पर जयपुर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने शिरकत की। उन्होंने प्रदर्शनी में लगे हथकरघा स्टॉलों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया और उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया।
हर धागे के पीछे एक परंपरा और मेहनत
बुनकरों और आमजन को संबोधित करते हुए कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने एक बेहद भावुक और विचारशील बात कही। उन्होंने कहा:
"हथकरघा वास्तव में केवल कपड़ों या शब्दों की कहानी नहीं है, बल्कि यह धागों की कहानी है। हर साड़ी, दुपट्टे और जैकेट के पीछे हमारे किसी बुनकर भाई-बहन की अनथक मेहनत, समर्पण और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा जुड़ी हुई है।"
आत्मनिर्भर भारत का आधार है हथकरघा
कर्नल राठौड़ ने रेखांकित किया कि हथकरघा उद्योग हमारे 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राजस्थान के कुटीर उद्योगों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा:
वैश्विक पहचान: राजस्थान के कोटा (कोटा डोरिया), बाड़मेर और सांगानेर के हथकरघा उत्पादों की दुनिया भर में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान है।
पीएम मोदी का विजन: हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं हैंडलूम वस्त्रों को धारण कर भारतीय बुनकरों की इस प्राचीन कला को वैश्विक मंच पर प्रमोट कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर शेयर करें बुनकरों की कहानी
मंत्री राठौड़ ने आमजन से एक अनोखी अपील करते हुए कहा कि जब भी आप कोई हैंडलूम उत्पाद खरीदें, तो केवल उत्पाद ही न खरीदें, बल्कि उसकी फोटो और उसके पीछे छिपी बुनकर की कहानी को सोशल मीडिया, रील और पोस्ट के माध्यम से दुनिया के साथ साझा करें।
उन्होंने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके पास मौजूद हथकरघा जैकेट की असली कीमत उसमें बुनी अनमोल यादों और कहानी की वजह से है।
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