कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ – 'यह शब्दों नहीं, धागों की कहानी है' : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर खास संदेश
नमस्कार दोस्तों,
हर साल 7 अगस्त को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, बुनकरों की मेहनत और स्वदेशी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है । इस वर्ष के आयोजन में कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने शिरकत की और अपने भाषण में हथकरघा की गहराई को एक नया आयाम दिया ।
उन्होंने कहा – "यह शब्दों नहीं, धागों की कहानी है ।"
कार्यक्रम में कर्नल राठौड़
कर्नल राठौड़ ने हथकरघा उत्पादों के स्टॉल का अवलोकन किया और उत्कृष्ट प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए। उन्होंने बुनकरों और कारीगरों से मुलाकात की और उनके काम की सराहना की ।
'धागों की कहानी' – कर्नल राठौड़ का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नल राठौड़ ने कहा:
"हथकरघा सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि धागों में बुनी गई कहानी है ।"
उन्होंने आगे कहा:
हथकरघा उद्योग आत्मनिर्भर भारत की पहचान है
यह भारतीय बुनकरों की कला एवं मेहनत को देश-दुनिया तक पहुँचाने का माध्यम है
राजस्थान के कोटा, बाड़मेर और सांगानेर सहित विभिन्न क्षेत्रों के हथकरघा उत्पादों की अपनी अलग पहचान है
कर्नल राठौड़ का निजी अनुभव
कर्नल राठौड़ ने हथकरघा के प्रति अपने लगाव को साझा करते हुए कहा:
"मेरे लिए हथकरघा से बने जैकेट की कीमत उसकी आर्थिक कीमत से कहीं अधिक है, क्योंकि उससे अनमोल यादें और एक कहानी जुड़ी होती है ।"
यह बात उनकी स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों के प्रति गहरी आस्था को दर्शाती है ।
प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा
कर्नल राठौड़ ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा:
"प्रधानमंत्री मोदी स्वयं हैंडलूम पहनकर भारतीय बुनकरों की कला और उनकी कहानी को वैश्विक मंच तक पहुँचा रहे हैं ।"
PM मोदी ने हमेशा 'वोकल फॉर लोकल' और 'खादी फॉर नेशन' जैसे अभियानों के माध्यम से हथकरघा को बढ़ावा दिया है ।
जनता से अपील – कहानी साझा करें
कर्नल राठौड़ ने आम जनता से अनुरोध किया:
"जब भी हैंडलूम उत्पाद खरीदें, तो उसकी तस्वीर के साथ उससे जुड़ी कहानी भी सोशल मीडिया पोस्ट और रील के माध्यम से साझा करें, ताकि भारतीय बुनकरों की कला और हुनर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाया जा सके ।"
हथकरघा – राष्ट्रीय गौरव
हथकरघा सिर्फ एक उद्योग नहीं है – यह:
भारत की सांस्कृतिक पहचान है
ग्रामीण रोजगार का बड़ा स्रोत है
लाखों बुनकर परिवारों की रोज़ी-रोटी है
निष्कर्ष
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर यह स्पष्ट कर दिया कि हथकरघा सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि एक भावना, एक इतिहास और एक कहानी है। आइए, हम सभी संकल्प लें कि हम हथकरघा उत्पादों को अपनाएँ, बुनकरों का सम्मान करें और उनकी कहानी को दुनिया तक पहुँचाएँ ।
'धागों की कहानी' – यही हमारी विरासत है, यही हमारी पहचान है। 🧵🇮🇳
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