उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का नमन: "उनकी रचनाएं मानवीय मूल्यों का शाश्वत मार्गदर्शक हैं"
जयपुर। हिंदी और उर्दू साहित्य के देदीप्यमान नक्षत्र, 'उपन्यास सम्राट' और 'कहानी सम्राट' मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती के अवसर पर राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
कर्नल राठौड़ ने मुंशी प्रेमचंद जी को याद करते हुए उन्हें केवल एक लेखक ही नहीं, बल्कि अपने युग का एक विजनरी और दृष्टा साहित्यकार करार दिया।
सत्य, संवेदना और समानता का अमर संदेश
मुंशी प्रेमचंद जी के कालजयी योगदान को नमन करते हुए कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा:
"महान साहित्यकार, उपन्यास सम्राट और युगद्रष्टा कथाकार मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर उन्हें मेरा शत-शत नमन। उनकी अमर रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को सत्य, संवेदना, समानता और मानवीय मूल्यों के मार्ग पर चलने के लिए सदैव प्रेरित करती रहेंगी।"
भारतीय समाज के यथार्थ का दर्पण
कर्नल राठौड़ ने मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कृतियों जैसे 'गोदान', 'गबन', 'ईदगाह', 'पूस की रात' और 'कफन' का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं केवल साहित्य नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण भारत के जीवन, किसानों के संघर्ष, सामाजिक विषमताओं और मानवीय संवेदनाओं का सच्चा जीवंत दस्तावेज हैं।
उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में भी मुंशी प्रेमचंद जी द्वारा स्थापित मूल्य—जैसे सामाजिक समानता, कमजोर वर्ग के प्रति संवेदना और सत्य का आचरण—उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। कर्नल राठौड़ ने युवाओं से अपील की कि वे मुंशी प्रेमचंद जी की रचनाओं को अवश्य पढ़ें और उनके बताए आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं।
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