22 साल बाद भी ताजा है वो ऐतिहासिक पल: कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने एथेंस ओलंपिक के रजत पदक को किया याद


 जयपुर। भारतीय खेल इतिहास का वह पन्ना आज भी हर देशवासी के दिल में गर्व की अनुभूति कराता है, जब 2004 के एथेंस ओलंपिक में कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने निशानेबाजी (डबल ट्रैप इवेंट) में भारत के लिए ऐतिहासिक रजत पदक जीता था। स्वतंत्र भारत के इतिहास में व्यक्तिगत श्रेणी में यह भारत का पहला ओलंपिक सिल्वर मेडल था।

इस स्वर्णिम उपलब्धि के 22 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कैबिनेट मंत्री और पूर्व ओलंपिक पदक विजेता कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए देशवासियों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है।

"सपना देखो, विश्वास करो और उसे सच कर दिखाओ"

कर्नल राठौड़ ने इस यात्रा को याद करते हुए लिखा:

"POV: Dream it. Believe it. Make it happen." "22 साल पहले, एक सपना ओलंपिक पदक बना। आज भी वो आभार और कृतज्ञता उतनी ही गहरी महसूस होती है। इस पूरी यात्रा के लिए आभार। हर उस भारतीय के प्यार, विश्वास और समर्थन के लिए दिल से धन्यवाद, जिसने उस ऐतिहासिक पल को अपना माना था—स्वतंत्र भारत का पहला ओलंपिक रजत पदक!"

एक मेडल जिसने बदल दी भारतीय खेलों की दिशा

एथेंस ओलंपिक में कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की यह सफलता केवल एक पदक तालिका का आंकड़ा नहीं थी, बल्कि इसने भारतीय युवाओं की सोच को बदल दिया। इस पदक ने यह साबित किया कि भारतीय एथलीट भी विश्व स्तर पर सर्वोच्च शिखरों को छू सकते हैं। इसी प्रेरणा का परिणाम है कि आज भारत निशानेबाजी और अन्य खेलों में विश्व पटल पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

कर्नल राठौड़ का यह संदेश आज भी हर युवा के लिए एक प्रेरणापुंज है कि यदि आपके सपनों में दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत का विश्वास हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है।

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