कारगिल विजय दिवस: "ये दिल माँगे मोर" — एक सैनिक की पुकार, एक राष्ट्र का संकल्प
भारत माँ के वीर सपूत, शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा का वह अमर वाक्य — "ये दिल माँगे मोर" — आज भी हर भारतीय के हृदय में गूँजता है। कारगिल विजय दिवस के इस पावन अवसर पर, कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने इन शब्दों की गहराई को एक नए आयाम में प्रस्तुत किया है।
"मोर" का अर्थ — सिर्फ युद्धभूमि नहीं, हर क्षेत्र में श्रेष्ठता
कैप्टन बत्रा ने जब यह शब्द कहे थे, तब वे एक युद्धभूमि पर खड़े थे। लेकिन कर्नल राठौड़ का संदेश यह है कि "मोर" की यह पुकार केवल सैनिकों के लिए नहीं — यह हर भारतीय नागरिक के लिए है।
- विज्ञान में "मोर" — अनुसंधान और नवाचार में आगे बढ़ना
- खेल में "मोर" — ओलंपिक और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराना
- शिक्षा में "मोर" — विश्वस्तरीय ज्ञान और कौशल अर्जित करना
- उद्योग में "मोर" — आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान
कारगिल — वह युद्ध जिसने भारत को परिभाषित किया
1999 का कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था — यह भारतीय संकल्पशक्ति की परीक्षा थी। हिमालय की बर्फीली चोटियों पर, जहाँ साँस लेना भी दुश्वार था, हमारे वीर जवानों ने असंभव को संभव कर दिखाया।
Point 4875 — यही वह चोटी थी जिसे कैप्टन विक्रम बत्रा ने जीता और शहीद हो गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को यह याद दिलाता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है।
कर्नल राठौड़ का संकल्प — आजीवन सेवा
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, जो स्वयं एक ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व सैन्य अधिकारी हैं, उनका यह कथन कि "हम आजीवन देश की सेवा और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे" — केवल एक राजनेता का वक्तव्य नहीं है। यह एक सैनिक की आत्मा से निकली हुई प्रतिज्ञा है।
उन्होंने अपना जीवन तीन क्षेत्रों में राष्ट्र को समर्पित किया है:
- सैन्य सेवा — भारतीय सेना में वर्षों की निष्ठावान सेवा
- खेल — ओलंपिक रजत पदक से भारत का नाम रोशन करना
- राजनीति — सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में नीति निर्माण
हम क्या कर सकते हैं?
कारगिल विजय दिवस केवल शहीदों को याद करने का दिन नहीं — यह अपने भीतर के सैनिक को जगाने का दिन है।
हर भारतीय अपने क्षेत्र में "मोर" की माँग कर सकता है। अपने काम में उत्कृष्टता लाएँ, अपने समाज में योगदान दें, और याद रखें — जब हर नागरिक अपनी भूमिका में श्रेष्ठ बनता है, तब राष्ट्र अजेय बनता है।
जय हिंद। जय भारत।
शहीदों को शत-शत नमन।

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