कारगिल विजय दिवस पर कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का संदेश: "देश के हर नागरिक को सैनिक की तरह निभानी होगी अपनी जिम्मेदारी"
जयपुर। शौर्य, पराक्रम और अमर बलिदान के प्रतीक कारगिल विजय दिवस के अवसर पर राजधानी जयपुर स्थित अमर जवान ज्योति पर एक भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा और कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अमर जवान ज्योति पहुंचकर देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले मां भारती के अमर वीर सपूतों को पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
इसके उपरांत आयोजित मुख्य कार्यक्रम में कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने मंच से देशवासियों और युवाओं को संबोधित करते हुए एक अत्यंत प्रेरणादायक विचार रखा।
सेना पर देशवासियों का अटूट विश्वास
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने भारतीय सेना के पराक्रम को नमन करते हुए कहा:
"देशवासियों को भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम पर इतना अटूट विश्वास है कि वे कभी यह सवाल नहीं पूछते कि क्या भारत अगले क्षण आज़ाद रहेगा या नहीं? यह विश्वास हमारी सेना के अद्वितीय साहस की देन है।"
हर घर से लड़ा गया था कारगिल युद्ध
उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध सिर्फ सीमाओं और रणक्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि यह देश के हर घर से लड़ा गया था। उस समय हर भारतवासी टीवी, रेडियो और संचार माध्यमों से पल-पल की खबर ले रहा था और दिल से अपने जवानों के साथ खड़ा होकर उन्हें अपना अटूट समर्थन दे रहा था।
'नमक, नाम और निशान' का जज्बा
कर्नल राठौड़ ने सेना के मूल मंत्र को रेखांकित करते हुए कहा कि देश के लिए मर मिटने का यह जज्बा 'नमक, नाम और निशान' से आता है। आज समय की मांग है कि देश का हर नागरिक एक सैनिक की भांति सोचे, अपने-अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी से जिम्मेदारी निभाए और भारत को मजबूत बनाए।
'ये दिल मांगे मोर' का नया अर्थ
परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के प्रसिद्ध कोड वर्ड को याद करते हुए कर्नल राठौड़ ने कहा:
"कैप्टन विक्रम बत्रा का 'ये दिल मांगे मोर' केवल एक नारा नहीं, बल्कि देश की सेना के जोश, जज्बे और जुनून का प्रतीक है। आज हमारे लिए 'मोर' का अर्थ यह संकल्प होना चाहिए कि हम भारत को हर क्षेत्र—शिक्षा, खेल, विज्ञान, उद्योग—में लगातार आगे लेकर जाएं।"
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