कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ की अनूठी पहल – कारगिल विजय दिवस पर बच्चों ने शहीद परिवारों के लिए लिखे भावपूर्ण पत्र
नमस्कार दोस्तों,
कारगिल विजय दिवस हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का दिन है। इस दिन हम उन वीर सैनिकों को याद करते हैं, जिन्होंने 1999 में दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए माँ भारती की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए ।
इस खास अवसर पर कैबिनेट मंत्री एवं सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने एक बेहद भावुक और प्रेरणादायी पहल की ।
बच्चों ने शब्दों और रंगों से व्यक्त की भावनाएं
कर्नल राठौड़ की प्रेरणा पर स्कूली विद्यार्थियों और गौरव सेनानियों ने मिलकर कारगिल युद्ध के अमर शहीदों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सम्मान प्रकट किया ।
इस कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने:
✍️ हाथों से पत्र लिखकर शहीदों को धन्यवाद दिया
🎨 चित्र बनाकर अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया
🇮🇳 तिरंगे और भारतीय सैनिकों से जुड़ी कलाकृतियाँ बनाईं
इन सभी संदेशों को अब कारगिल के शहीद परिवारों तक पहुँचाया जाएगा, ताकि उन्हें यह अहसास हो सके कि पूरा देश उनके त्याग और बलिदान को आज भी गर्व के साथ याद करता है ।
कर्नल राठौड़ का भावुक संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नल राठौड़ ने कहा:
"शहीद केवल इतिहास का हिस्सा नहीं होते, बल्कि राष्ट्र की आत्मा होते हैं। उनके परिवारों का साहस, धैर्य और राष्ट्रभक्ति हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।"
उन्होंने आगे कहा कि जब बच्चे किताबों से आगे बढ़कर शहीदों के परिवारों के लिए अपने हाथों से पत्र लिखते हैं और भावनाएँ व्यक्त करते हैं, तब देशभक्ति केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक संस्कार बन जाती है । यही भारत की गौरवशाली परंपरा है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक निरंतर आगे बढ़ती है ।
'विकसित भारत' के संकल्प से जुड़ाव
कर्नल राठौड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि 'विकसित भारत' का संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऐसे राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है जो अपने वीरों के सम्मान, त्याग और मूल्यों को सदैव सर्वोच्च स्थान देता है ।
क्यों है यह पहल खास?
शहीद सैनिकों के परिवार अक्सर सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हैं । कर्नल राठौड़ ने इस पहल के माध्यम से नई पीढ़ी को शहीदों की विरासत से जोड़ने का काम किया है ।
यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की निरंतर प्रक्रिया है, जहाँ बच्चे अपने वीरों के बारे में पढ़ते नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं ।
श्रद्धांजलि के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन दो मिनट का मौन रखकर और माँ भारती की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी अमर वीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया ।
निष्कर्ष
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ की यह पहल सच्ची देशभक्ति और कृतज्ञता का अद्भुत उदाहरण है। इसने बच्चों को सिखाया कि शहीदों का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर पल की भावना होनी चाहिए।
जय हिंद! 🇮🇳
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