कारगिल विजय दिवस: 'नाम, नमक और निशान' ही भारतीयता की सच्ची पहचान — कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
जयपुर। 26 जुलाई, कारगिल विजय दिवस का वह ऐतिहासिक और गौरवशाली दिन है जो हर भारतीय के सीने को गर्व से चौड़ा कर देता है। इस अवसर पर राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित विशेष कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान कर्नल राठौड़ ने सैन्य परंपरा के सबसे पावन सूत्र 'नाम, नमक और निशान' के महत्व को देशवासियों के सामने साझा करते हुए कारगिल के अमर शहीदों को भावभरे श्रद्धापुष्प अर्पित किए।
क्या है 'नाम, नमक और निशान' का अर्थ?
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने भारतीय सेना की कार्यप्रणाली और देशभक्ति के इस त्रिमूर्ति सिद्धांत को विस्तार से समझाते हुए कहा:
"नाम, नमक और निशान... यही हमारी भारतीयता की असली पहचान हैं।"
नाम: अपनी रेजीमेंट, अपने देश और अपनी मिट्टी का नाम, जिसे सैनिक कभी झुकने नहीं देता।
नमक: देश के प्रति वफादारी और उस पावन धरती का कर्ज, जिसे वह अपने रक्त की अंतिम बूंद से चुकाता है।
निशान: हमारा तिरंगा, हमारा राष्ट्रध्वज, जिसकी आन-बान और शान के लिए मां भारती का लाल हंसते-हंसते न्योछावर हो जाता है।
शहीदों को शत्-शत् नमन
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी और कर्नल राठौड़ ने संयुक्त रूप से 1999 के कारगिल युद्ध में अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देने वाले वीरों की शहादत को नमन किया। कर्नल राठौड़ ने कहा कि यह दिन केवल जीत का जश्न नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों के त्याग और बलिदान को याद करने का दिन है जिनके बेटों ने माइनस तापमान में भी बर्फ की चोटियों पर तिरंगा फहराया था।
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