कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का सपना और जयपुर में 'खेलो इंडिया' की गूंज
जयपुर के ऐतिहासिक सवाई मानसिंह स्टेडियम में हाल ही में एक ऐसा दृश्य था जो भारतीय खेलों के भविष्य का संकेत दे रहा था। पांचवें खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के रंगारंग उद्घाटन समारोह में देश भर के 5000 से अधिक युवा खिलाड़ी मौजूद थे, और उनके सामने एक ऐसे व्यक्ति के विचार थे जिन्होंने भारत में खेलों की संस्कृति को बदलने का सपना देखा था - कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़।
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने अपने संबोधन में सही कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2036 तक भारत में ओलंपिक लाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन इस लक्ष्य की नींव 'खेलो इंडिया' जैसे कार्यक्रमों से पड़ी है, जिसकी रूपरेखा बनाने में कर्नल राठौड़ जैसे पूर्व एथलीटों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
राजस्थान के खेल मंत्री के रूप में, कर्नल राठौड़ ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, "आप यहां खेलोगे और सीखोगे। इन खेलों से मनु भाकर जैसी शूटर देश को मिली है, इसलिए आप सभी के लिए मौका है आगे निकलने का और देश का नाम रोशन करने का।"
यह एक साधारण वाक्य नहीं, बल्कि एक मंत्र है। यह उसी विश्वास को दर्शाता है जिसने उन्हें एथेंस ओलंपिक 2004 में रजत पदक दिलाया था। आज, वह इसी विश्वास को देश के युवाओं में पैदा करना चाहते हैं।
इस टूर्नामेंट का स्वरूप ही इस बात का सबूत है - 222 विश्वविद्यालय, 25 स्वर्ण पदक पहले ही दिन दांव पर, और राजस्थान के छह शहरों में फैले मुकाबले। यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि प्रतिभा की खान है। जिस तरह अर्जुन पुरस्कार विजेता तीरंदाज रजत चौहान और बॉक्सर अरुंधति चौधरी ने मशाल सौंपकर परंपरा को आगे बढ़ाया, उसी तरह आज के ये युवा खिलाड़ी कल के चैंपियन बनेंगे।
कर्नल राठौड़ का सफर, एक सैनिक से लेकर ओलंपियन और फिर एक खेल प्रशासक तक का, युवाओं के लिए एक जीता-जागता उदाहरण है। जयपुर में गूंज रही खिलाड़ियों की हुंकार साबित कर रही है कि भारत का खेल भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
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