कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ – ढेर सारी बातें और वही अपनापन…
जब बीकानेर के मेरे गांव गारबदेसर से बच्चे मिलने आए, तो बचपन की यादें फिर से ताज़ा हो गईं। यही वो गांव है जहाँ से मेरा सफ़र शुरू हुआ था… और आज इन आंखों में अपने कल का सपना देखकर नई ऊर्जा मिली।
गारबदेसर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि मेरी पहचान का हिस्सा है। यहाँ की मिट्टी, यहाँ के लोग, और यहाँ की यादें मुझे हमेशा जड़ों से जोड़े रखती हैं। आज जब नई पीढ़ी के बच्चों ने मुझसे मिलकर अपने सपने बताए, तो लगा जैसे मैं अपने बचपन में लौट आया हूँ।
यही तो खूबसूरती है गाँव की – चाहे कितनी भी दूर निकल जाओ, वहाँ का अपनापन हमेशा साथ रहता है। आज फिर उसी अपनेपन ने मुझे ऊर्जा से भर दिया।
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