कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: लोकतंत्र के संरक्षक और सेनानियों के सम्मान की गाथा
सवाई माधोपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस और आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर संगोष्ठी
कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व सेना अधिकारी कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने सवाई माधोपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस तथा आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक विशेष संगोष्ठी में भाग लिया। इस कार्यक्रम में उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा में अपना योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और आपातकाल के दौरान संघर्ष करने वाले नायकों को सम्मानित किया।
भव्य स्वागत और जनसमर्थन
सवाई माधोपुर पहुँचने पर कर्नल राठौड़ का जोरदार स्वागत हुआ। स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम जनता ने उनका उत्साहपूर्ण अभिनंदन किया, जो उनकी लोकप्रियता और जनता के बीच विश्वास को दर्शाता है।
लोकतंत्र के सेनानियों का सम्मान
संगोष्ठी में बोलते हुए कर्नल राठौड़ ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को याद किया और कहा कि उनका संघर्ष भारत की एकता और अखंडता के लिए था। उन्होंने आपातकाल (1975-77) के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की सराहना की।
"लोकतंत्र की रक्षा करने वाले सेनानियों का सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। आपातकाल के काले दिनों ने हमें सिखाया कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र कभी भी हल्के में नहीं लेने चाहिए।"
— कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
निष्कर्ष
यह कार्यक्रम न केवल ऐतिहासिक बलिदानों को याद करने का अवसर था, बल्कि वर्तमान और भविष्य में लोकतंत्र को मजबूत बनाने का संकल्प भी था। कर्नल राठौड़ ने एक बार फिर साबित किया कि वे न केवल एक कुशल नेता हैं, बल्कि देशभक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित एक सच्चे सेनानी भी हैं।

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