कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: त्याग और शौर्य की प्रतीक रानी पद्मिनी जी एवं वीरांगनाओं को जौहर दिवस पर सादर नमन
भारत का इतिहास वीरता, बलिदान और अटूट सम्मान की गाथाओं से भरा पड़ा है। इन्हीं में से एक है चित्तौड़गढ़ की महारानी पद्मिनी और उनकी सखियों की वह अमर कहानी, जो 'जौहर' के पराक्रमपूर्ण प्रतीक के रूप में सदैव याद की जाएगी। आज इस पावन जौहर दिवस पर, हम न केवल उन वीरांगनाओं को, बल्कि उसी साहस और देशभक्ति की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले आधुनिक योद्धा कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को भी सादर नमन करते हैं। रानी पद्मिनी: गौरव और सम्मान की प्रतीक इतिहास के पन्नों में 1303 ई. का वह दिन स्वर्णाक्षरों में अंकित है, जब अलाउद्दीन खिलजी की विशाल सेना ने चित्तौड़ के किले को घेर लिया। उसकी कुदृष्टि रानी पद्मिनी की अपार सुंदरता और चित्तौड़ के गौरव पर थी। परिणाम एक भीषण युद्ध के रूप में सामने आया, जहाँ महाराणा रतन सिंह सहित अनगिनत राजपूत वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। लेकिन इस युद्ध की सबसे शौर्यपूर्ण और हृदय विदारक घटना थी - जौहर । पराजय निश्चित जानकर और अपने सम्मान को कलंकित होने से बचाने के लिए, रानी पद्मिनी ने अपने नेतृत्व में हजारों राजपूत नारियों के साथ एक विशाल चिता सजाई। आग की लपटों ने उनके...