कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बहरोड़ में किया सांसद खेल उत्सव का शुभारंभ – “जो खेलेगा, वो खिलेगा”
नमस्कार दोस्तों,
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ एक बार फिर अपने अनूठे अंदाज में सुर्खियों में हैं। इस बार वो राजस्थान के बहरोड़ में सांसद खेल उत्सव का शुभारंभ करने पहुंचे। और जैसी उनकी शैली है, बात भी दिल को छूने वाली और दिमाग में घर करने वाली की।
उन्होंने इस मौके पर कहा – “जो खेलेगा, वो खिलेगा।”
आइए इस आयोजन और इसके पीछे की सोच को समझते हैं।
बहरोड़ में खेलों का उत्सव
बहरोड़, जो आमतौर पर राजनीतिक सभाओं यो प्रशासनिक खबरों से चर्चा में आता है, इस बार दौड़, कूद, और खिलाड़ियों के जोश से गुलज़ार था। सांसद खेल उत्सव का उद्देश्य सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रासरूट स्तर पर खेल संस्कृति को जगाना है।
कर्नल राठौड़, जो खुद ओलंपिक शूटर रहे हैं, जानते हैं कि प्रतिभा गांवों और छोटे कस्बों में दबी होती है – बस उसे मंच और मौका चाहिए।
“जो खेलेगा, वो खिलेगा” – क्या मतलब?
राठौड़ का यह नारा सिर्फ स्लोगन नहीं है। इसके पीछे गहरा अर्थ है:
खेल से अनुशासन आता है – जो खेलता है, वो समय, नियम और टीम वर्क को समझता है।
खेल से आत्मविश्वास बढ़ता है – हार-जीत के झटके इंसान को मजबूत बनाते हैं।
खेल से स्वास्थ्य बनता है – फिर वही स्वास्थ्य जीवन के हर क्षेत्र में खिलता है।
खेल कैरियर भी बनाता है – राठौड़ खुद इसकी मिसाल हैं।
सिर्फ शुभारंभ नहीं, संकल्प
इस आयोजन की खास बात ये रही कि यह सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं था। कर्नल राठौड़ ने साफ कहा कि ऐसे खेल उत्सव लगातार होंगे, ताकि:
हर गाँव का बच्चा खेल को करियर के रूप में देखे
खिलाड़ियों को इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग मिले
पालनहार खेल को “समय की बर्बादी” न समझें
हमारी सीख
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं – वो एक स्पोर्ट्स माइंडसेट हैं। जहाँ वो जाते हैं, खेल उत्सव बन जाता है। और उनका मंत्र “जो खेलेगा, वो खिलेगा” हर माता-पिता, हर टीचर और हर युवा को सोचने पर मजबूर करता है।
तो देर किस बात की? उठो, दौड़ो, खेलो – क्योंकि जो खेलेगा, वही सच में खिलेगा।
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