विश्व पर्यावरण दिवस पर कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का झोटवाड़ा से संदेश: "प्रकृति संरक्षण हमारी संस्कृति का मूल तत्व है"
जयपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनमानस को जागरूक किया और इसे हमारी भारतीय संस्कृति का अटूट हिस्सा बताया।
प्रकृति को कुछ लौटाने का समय
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सनातन परंपरा हमेशा से ही धरती, नदियों, पर्वतों और वृक्षों को पूजनीय मानती आई है। उन्होंने कहा:
"यह पृथ्वी करोड़ों लोगों की जरूरतें पूरी करती है और हमें जीवन जीने के लिए सभी आवश्यक संसाधन देती है। ऐसे में हमारा भी यह परम कर्तव्य बनता है कि हम प्रकृति को कुछ वापस लौटाएं।"
'एक पेड़ मां के नाम' अभियान और जल संरक्षण
मंत्री राठौड़ ने इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया:
एक पेड़ मां के नाम: उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि इस अभियान के तहत प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और केवल लगाए ही नहीं, बल्कि उसके बड़े होने तक उसके संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी उठाए।
फलदार और छायादार वृक्ष: उन्होंने लोगों से ऐसे पेड़ लगाने का आग्रह किया जो आने वाली पीढ़ियों को छाया के साथ-साथ फल भी दे सकें।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग (Rain Water Harvesting): पानी को प्रकृति का अमूल्य उपहार बताते हुए उन्होंने हर नागरिक से अपने घरों की छतों पर वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणाली स्थापित करने की अपील की।
पक्षियों के लिए लगाए परिंडे
पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देते हुए कर्नल राठौड़ ने कार्यक्रम के दौरान पक्षियों के लिए परिंडे भी बांधे, ताकि इस भीषण गर्मी में मूक पक्षियों को पीने का पानी मिल सके।
निष्कर्ष: कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि पर्यावरण का संरक्षण किसी एक दिन का कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। आइए, हम सब मिलकर इस मुहिम का हिस्सा बनें।
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