डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: राष्ट्र की एकता के अमर प्रहरी को कोटि-कोटि नमन
राष्ट्र की एकता और अखंडता के वीर प्रहरी, भारतीय जनसंघ के श्रद्धेय संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने इस पावन अवसर पर डॉ. मुखर्जी के बलिदान और संघर्ष को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने राष्ट्र को सर्वोपरि माना
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे — वे एक द्रष्टा, विचारक और राष्ट्रभक्त थे जिन्होंने भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
जब देश विभाजन की पीड़ा से उबर रहा था, तब डॉ. मुखर्जी ने अपनी दूरदर्शिता से यह समझा कि एक राष्ट्र, एक संविधान और एक निशान ही भारत की असली पहचान है।
कश्मीर के लिए अद्वितीय संघर्ष
उनका सबसे ऐतिहासिक संघर्ष था — कश्मीर की पूर्ण एकता के लिए उनका आंदोलन। जब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के तहत अलग परमिट व्यवस्था लागू थी, तब डॉ. मुखर्जी ने यह नारा दिया:
"एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान — नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे।"
इसी संघर्ष के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी। 1953 में श्रीनगर में रहस्यमय परिस्थितियों में उनका निधन हुआ — लेकिन उनका विचार आज भी जीवित है।
भारतीय जनसंघ की स्थापना — एक वैचारिक क्रांति
1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना करके डॉ. मुखर्जी ने एक ऐसी वैचारिक धारा को संगठित रूप दिया जो भारतीयता, सांस्कृतिक गर्व और राष्ट्रीय अखंडता पर आधारित थी। उनकी यह विरासत आज भी करोड़ों भारतीयों को प्रेरणा देती है।
कर्नल राठौड़ का संदेश
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राष्ट्र की एकता, अखंडता और वैचारिक स्वाभिमान के लिए किया गया संघर्ष हम सबके लिए प्रेरणास्रोत है।
उनके बलिदान को याद रखना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
🙏 डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को कोटि-कोटि नमन 🙏
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