कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ – कर्नाटक केसरी जगन्नाथराव जोशी जी को शत-शत नमन
नमस्कार दोस्तों,
आज हम एक ऐसे महान व्यक्तित्व को याद कर रहे हैं, जिन्होंने अपना सारा जीवन मातृभूमि की सेवा में समर्पित कर दिया। श्री जगन्नाथ राव जोशी जी – भारतीय जनसंघ के स्तंभ, अद्भुत वक्ता और गोवा मुक्ति संग्राम के महानायक। कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने उनकी जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
कौन थे जगन्नाथराव जोशी?
23 जून 1920 को कर्नाटक के नरगुंड में जन्मे जगन्नाथराव जोशी एक ऐसे नेता थे, जिनकी पहचान सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं थी । उनकी वाक्पटुता और संगठन क्षमता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाई। वे हिंदी, अंग्रेजी, कन्नड़ और मराठी सहित कई भाषाओं में पारंगत थे, जिससे वे देश के हर कोने में अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकते थे ।
गोवा मुक्ति संग्राम – अदम्य साहस की मिसाल
स्वतंत्रता के बाद भी गोवा पुर्तगालियों के अधीन था। 23 जून 1955 को, अपने 35वें जन्मदिन पर, जोशी जी ने सैकड़ों संघ और जनसंघ कार्यकर्ताओं के साथ गोवा की ओर कूच किया । जब उन्हें बिना परमिट गोवा में प्रवेश करने पर गिरफ्तार किया गया, तो उन्होंने अदालत में शेर की तरह दहाड़ते हुए कहा:
"मैं गोवा में यह पूछने आया हूँ कि तुम (पुर्तगाली) गोवा में क्यों आए हो? गोवा मेरी मातृभूमि का हिस्सा है और मुझे अपनी मातृभूमि के किसी भी हिस्से में जाने का अधिकार है।"
यही वह बयान था जिसने उन्हें "कर्नाटक केसरी" (कर्नाटक का शेर) की उपाधि दिलाई ।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ की श्रद्धांजलि
कर्नल राठौड़ ने अपने संदेश में कहा:
"श्री जगन्नाथ राव जोशी जी, भारतीय जनसंघ के स्तंभ, उत्कृष्ट वक्ता और गोवा मुक्ति संग्राम के महान नायक, 'कर्नाटक केसरी' के रूप में पूजनीय, उनकी जयंती पर मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। राष्ट्र के प्रति उनका अदम्य साहस, अद्वितीय संगठन क्षमता और निस्वार्थ सेवा भावना हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत हैं।"
हम सबके लिए प्रेरणा
जगन्नाथराव जोशी का जीवन हमें सिखाता है:
देश के लिए संघर्ष करने का साहस
संगठन निर्माण की कला
वाक्पटुता से जनता तक पहुँचने की क्षमता
और सबसे बढ़कर – आदर्शों के प्रति अटूट निष्ठा
निष्कर्ष
आज जब हम 'कर्नाटक केसरी' को याद करते हैं, तो हमें उनके बलिदान और योगदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने न केवल गोवा को आज़ाद कराने में अहम भूमिका निभाई, बल्कि कर्नाटक में जनसंघ और भाजपा की नींव भी मजबूत की ।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के शब्दों में – उनकी विरासत हर राष्ट्रभक्त के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी ।
जय हिंद, जय कर्नाटक केसरी! 🇮🇳

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