परमवीर चक्र कर्नल होशियार सिंह: वीरता की अमर गाथा
हर देश की मिट्टी में कुछ ऐसे वीर जन्म लेते हैं, जिनकी कहानियाँ समय के पन्नों पर अमर रहती हैं। कर्नल होशियार सिंह (PVC) उन्हीं रत्नों में से एक हैं। 5 मई, 1936 को जन्मे इस महान योद्धा ने 1965 के भारत-पाक युद्ध में वीरता की ऐसी मिशाल पेश की कि दुश्मन भी उनके साहस को सलाम करता है।
ऑपरेशन की कहानी:
10 नवंबर, 1965 को पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेक्टर पर भारी गोलाबारी की। कर्नल होशियार सिंह अपनी 3 ग्रेनेडियर्स बटालियन के साथ डोगराई गाँव के पास मोर्चा संभाले थे। दुश्मन के टैंक और पैदल सेना का हमला देखते ही उन्होंने अपने सैनिकों को प्रेरित किया। जब एक गोली ने उनकी बंदूक छिन्न-भिन्न कर दी, तो उन्होंने खंजर निकाल लिया और "जय हिंद" का नारा लगाते हुए दुश्मन पर झपट पड़े। इस युद्ध में उन्होंने तीन पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट किया और अपनी सेना को ऐतिहासिक विजय दिलाई।
परमवीर चक्र:
इस अलौकिक साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे पहले राजपूताना राइफल्स अधिकारी थे जिन्हें यह सम्मान मिला।
प्रेरणा:
आज के युवाओं के लिए कर्नल होशियार सिंह केवल एक नाम नहीं, बल्कि कर्तव्य, बलिदान और राष्ट्रप्रेम का जीता-जागता प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सीमाएँ देह की होती हैं, पर इरादे अमर होते हैं।
श्रद्धांजलि:
उनकी जयंती पर मैं उन चरणों में नतमस्तक हूँ जिन्होंने मिट्टी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। भारत माता की जय!

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