सोमनाथ की अमर चेतना और भारत का अटूट संकल्प: प्रधानमंत्री मोदी के लेख पर कर्नल राज्यवर्धन

 


हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार और इसकी ऐतिहासिक यात्रा पर एक अत्यंत प्रेरणादायक लेख साझा किया है। इस लेख को कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने भारत के 'विनाश से निर्माण' तक के सफर का एक जीवंत चित्रण बताया है।

मुख्य बिंदु: * अमर चेतना का प्रतीक: सोमनाथ मंदिर केवल एक संरचना नहीं, बल्कि भारत की उस अदम्य भावना का प्रतीक है जो हर विनाश के बाद और अधिक शक्ति के साथ उभरती है। प्रधानमंत्री का लेख इस अमर चेतना को गहराई से प्रतिबिंबित करता है।

  • विनाश से निर्माण की गाथा: सदियों के संघर्ष और आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ का पुनरुद्धार भारत के 'अविनाशी' होने का प्रमाण है। वर्ष 2026 इस महान मंदिर के पहले आक्रमण के 1000 वर्ष और इसके आधुनिक पुनरुद्धार के 75 गौरवशाली वर्ष पूरे होने का साक्षी है।

  • सांस्कृतिक शक्ति को नमन: कर्नल राठौड़ के अनुसार, यह लेख हमारी बेदाग सांस्कृतिक शक्ति और पूर्वजों के उन बलिदानों को श्रद्धांजलि देता है जिन्होंने इस विरासत को सुरक्षित रखा।

निष्कर्ष: आज का 'नया भारत' प्रधानमंत्री के 'विकास भी, विरासत भी' के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। सोमनाथ की यह गौरवगाथा हमें आत्मनिर्भर और गौरवशाली भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देती है।

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