गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती: कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के विचारों का प्रतिबिंब
आज गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी की जयंती है। विश्वकवि, दार्शनिक और मानवता के सशक्त स्वर को मेरा सादर नमन।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ जी के शब्दों में, "गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी की जयंती पर, विश्वकवि, दार्शनिक और मानवता के मुखर स्वर को मेरा विनम्र अभिवादन। शांतिनिकेतन के आदर्श और राष्ट्रगान की गूंज हम सभी के भीतर देशभक्ति की चिरागी ज्योति को हमेशा प्रज्वलित करते रहेंगे।"
गुरुदेव की प्रासंगिकता:
आज जब दुनिया संघर्षों और असहिष्णुता से गुज़र रही है, टैगोर का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। उनका शांतिनिकेतन सिर्फ एक विद्यालय नहीं था, बल्कि एक ऐसा विचार था जहाँ मन बिना भय के रह सके और सिर गर्व से ऊँचा उठा सके।
राष्ट्रगान और आंतरिक अग्नि:
"जन गण मन" सिर्फ एक गीत नहीं है; यह हर भारतीय के रक्त में बहने वाली ऊर्जा है। जैसा कि कर्नल साहब ने कहा, यह हमारे भीतर देशभक्ति की चिरागी ज्योति को प्रज्वलित करता है।
आइए, आज हम उनके साहित्य, उनके विचारों और सत्य-प्रेम के उस संदेश को अपनाने का संकल्प लें, जो उन्होंने हमें दिया।
जय हिंद!

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