कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: अद्वैत के प्रणेता आदि शंकराचार्य की जयंती पर विशेष आलेख
आज हमारे देश के महानतम चिन्तक, अद्वैत वेदांत के प्रणेता, सांस्कृतिक एकता के वास्तुकार, महान दार्शनिक और युग निर्माता जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी की जयंती है।
इस पावन अवसर पर, कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ (सेवानिवृत्त) ने उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा:
"अद्वैत वेदांत के प्रणेता, सांस्कृतिक एकता के वास्तुकार, महान दार्शनिक और युग निर्माता जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी की जयंती पर उन्हें मेरा कोटि-कोटि नमन। उनका संपूर्ण जीवन हमें सदा लोक कल्याण और सत्य की खोज के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता रहेगा।"
आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्षों के जीवनकाल में भारत को एक सूत्र में पिरोया। केरल से कश्मीर तक पैदल यात्रा करके उन्होंने 'एकम् सत् विप्रा: बहुधा वदन्ति' (सत्य एक है, विद्वान उसे अनेक नामों से पुकारते हैं) के सिद्धांत को प्रतिष्ठित किया।
हमें उनसे क्या सीखना चाहिए?
विवेक और वैराग्य: भौतिक सुखों के इस युग में, शंकराचार्य हमें आत्मनिरीक्षण का मार्ग दिखाते हैं।
लोक कल्याण: उनका संपूर्ण दर्शन 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' (सब सुखी हो) पर केंद्रित है।
सत्य की खोज: कभी भी झूठ या अन्याय को स्वीकार न करें।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के शब्दों में, इन महान विभूति का जीवन हमारे लिए एक शाश्वत प्रेरणा स्रोत है। आइए, इस जयंती पर हम संकल्प लें कि हम अपने जीवन में एकता, अद्वैत भावना और सत्य के मार्ग का अनुसरण करेंगे।
जय शंकर! 🇮🇳

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