कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का भावपूर्ण नमन: पंडित रवि शंकर की जयंती पर विशेष आलेख
भारतीय संगीत की गंगा में बहने वाली सितार की वह मधुर झंकार, जिसने सप्तकों की सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया को एक सूत्र में बांध दिया। आज पंडित रवि शंकर जी की जयंती पर हम न केवल उन महान विभूति को याद कर रहे हैं, बल्कि उनके प्रति कृतज्ञता का भाव रखने वाले हर उस व्यक्तित्व को भी साष्टांग प्रणाम कर रहे हैं, जो भारतीय कला के इस गौरव को सहेजे हुए है।
हाल ही में कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ जी ने पंडित रवि शंकर जी की जयंती पर जो भावना व्यक्त की है, वह वाकई में दिल को छू लेने वाली है। उन्होंने लिखा:
"भारत रत्न पंडित रवि शंकर जी की जयंती पर सादर नमन। सितार की मधुर ध्वनियों से विश्वभर में भारत की सांस्कृतिक विरासत का मान बढ़ाने वाली आपकी कला-साधना हम सबके लिए सदैव प्रेरणा का पुंज रहेगी।"
यह शब्द सिर्फ एक श्रद्धांजलि नहीं हैं; यह उस सांस्कृतिक दूत के प्रति सम्मान है, जिन्होंने बीटल्स से लेकर वुडस्टॉक तक, हर जगह भारत की आत्मा बिखेरी। पंडित जी ने सितार को केवल एक वाद्य नहीं बनाया, बल्कि उसे विश्व शांति का संदेश देने वाला माध्यम बनाया।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का यह नमन उनके कला के प्रति गहरे लगाव और राष्ट्रीय विरासत के प्रति सम्मान को दर्शाता है। आइए, हम सभी इस अवसर पर पंडित रवि शंकर जी को याद करें और उनकी साधना को नमन करें।
जय हिंद! जय भारतीय कला!

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