कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का दीक्षांत समारोह में छात्रों को संदेश: "बदलाव लाने वाले बनो, या बदलाव के लिए तैयार रहो"


 

जयपुर। बिरला ऑडिटोरियम में बुधवार, 22 अप्रैल को राजस्थान विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी का द्वितीय दीक्षांत समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर कुल 556 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 189 पोस्ट ग्रेजुएट और 367 स्नातक शामिल रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में कर्नल राठौड़ ने छात्रों को जीवन का सबसे बड़ा मंत्र दिया। उन्होंने कहा, "आपका जीवन अभी शुरू हो रहा है। आप इस स्किल के साथ आगे क्या करेंगे, यही आपके जीवन को परिभाषित करेगा।" उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे खुद को सीमाओं में न बांधें और लगातार सीखते रहने की मानसिकता अपनाएं।

उन्होंने आज की डायनेमिक दुनिया का हवाला देते हुए कहा, "या तो आप बदलाव लाने वाले बनिए, या फिर बदलाव के लिए तैयार रहिए।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्किल, री-स्किल और अपस्किल' विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 में पीएम मोदी ने समझा था कि दुनिया में जो युवा जनसंख्या बढ़ रही है, वो भारत में है। इसलिए उन्हें स्किल करना जरूरी है। उन्होंने कहा, "यह एक लगातार चलने वाला प्रोसेस है और ये हर एक पर लागू होता है। आज दुनिया आपके इंतजार में है।"

केंद्र सरकार की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उद्योग मंत्री ने बताया कि ये योजनाएं स्किलिंग को इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी से जोड़ने का मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार कर रही हैं।

एनडीए के अनुभव साझा किए:
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने अपने एनडीए के दिनों को याद करते हुए बताया कि सेना में उन्हें वेल्डिंग, आर्किटेक्चर और कंप्यूटर जैसी स्किल्स सिखाई गईं, जिससे उनका समग्र विकास हुआ। उन्होंने छात्रों को मल्टी-डायमेंशनल स्किल्स विकसित करने की सलाह दी।

उन्होंने अभिभावकों की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को सही रास्ते पर रखना आसान नहीं होता। साथ ही, छात्रों को असफलता से न डरने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, "असफलता आपको ग्रो करती है, इसलिए इससे निराश न हों। अपने टारगेट बड़े रखें और उस तक पहुंचने की कोशिश करते रहें।"

अंत में उन्होंने सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध संदेश "उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको" को अपनाने का आह्वान किया।

यह दीक्षांत समारोह न केवल डिग्री वितरण का अवसर था, बल्कि युवाओं को प्रेरणा देने वाला एक ऐतिहासिक क्षण भी रहा।

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