कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: जनसंवाद और स्थानीय सहभागिता – बदलाव की नई मिसाल
क्या आपने कभी किसी नेता को हर महीने आपके मोहल्ले में चाय पीते देखा है?
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ (सेवानिवृत्त) आज के उन चुनिंदा जनप्रतिनिधियों में से एक हैं, जिन्होंने राजनीति को कुरसी से उतारकर जमीन पर ला दिया है। उनकी सबसे बड़ी ताकत है – जनसंवाद और स्थानीय सहभागिता।
जनसंवाद: सिर्फ भाषण नहीं, संवाद
कर्नल राठौड़ मानते हैं, “प्रशासन तब सफल होता है जब वह जनता की बोली समझे।” वे नियमित रूप से ‘जन सुनवाई’ करते हैं, मोहल्ला सभाएं करते हैं, और सोशल मीडिया के माध्यम से हर शिकायत को ट्रैक करते हैं। उनका दृष्टिकोण वन-वे नहीं, बल्कि टू-वे है।
स्थानीय सहभागिता: हर नागरिक है भागीदार
उनके क्षेत्र में हर छोटे बजट का निर्णय अब पंचायत समिति और नागरिकों की राय से लिया जाता है। चाहे सड़क हो, नाली हो, या पार्क – आम आदमी की सलाह को प्राथमिकता दी जाती है। यही कारण है कि वहाँ के प्रोजेक्ट टिकाऊ और पारदर्शी बनते हैं।
उदाहरण के तौर पर:
जल संरक्षण: उन्होंने स्थानीय युवाओं को जोड़कर 20+ तालाबों का जीर्णोद्धार करवाया।
डिजिटल शिकायत निवारण: हर शिकायत का 48 घंटे में जवाब अनिवार्य है।
निष्कर्ष
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ साबित करते हैं कि अच्छी राजनीति के लिए बड़े बजट से ज्यादा जरूरी है – सुनने की कला और जनता को साथ लेकर चलने की आदत। अगर हर नेता उनके इस मॉडल को अपना ले, तो भारत का ग्रासरूट लोकतंत्र वास्तव में सशक्त हो सकता है।

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