कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: “आप सब मेरी असली ताकत हो, मेरी एनर्जी हो” – कार्यकर्ताओं के साथ खास गपशप के पल
नमस्ते दोस्तों,
आज की पोस्ट थोड़ी हटकर है। ये कोई राजनीतिक विश्लेषण नहीं है, न ही कोई बड़ा एलान। ये है दिल की बात, उन पलों की कहानी जो हमें याद दिलाते हैं कि असली ताकत क्या होती है।
हाल ही में कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ जी से मिलने का मौका मिला। लेकिन ये कोई औपचारिक बैठक नहीं थी। ये थी “कुछ खास गपशप” – वो गपशप जहां नेता और कार्यकर्ता के बीच की दीवार टूट जाती है। वो पल जब एक कमांडर अपने सैनिकों से कहता है – “तुम हो तो मैं हूं।”
राठौड़ साहब, जो अपनी सादगी और माटी से जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं, इस बार भी उसी अंदाज में मिले। हंसते-हंसाते, बिना किसी झिझक के। कार्यकर्ता उनके चारों ओर थे – कुछ पुराने साथी, कुछ नए चेहरे। लेकिन सबकी आंखों में एक ही चमक थी – भरोसा।
और तभी उन्होंने दिल को छू लेने वाले शब्द कहे:
“आप सब मेरी असली ताकत हो, मेरी एनर्जी हो।”
ये सिर्फ शब्द नहीं थे। ये एक एहसास था। एक कर्नल का, जिसने देश के लिए सीमा पर लड़ाई लड़ी, अब अपने ही लोगों के बीच ये कहते हुए – कि उनकी असली ताकत उनके कार्यकर्ता हैं।
उस पल मैंने सोचा – शायद यही सच्ची नेतृत्व की परिभाषा है। जहां आप अपने लोगों को एनर्जी बताओ, उन्हें ऊर्जा का स्रोत मानो, न कि सिर्फ वोट या संख्या।
वो गपशप के कुछ खास पल:
एक युवा कार्यकर्ता ने पूछा – “सर, थकान नहीं होती?”
राठौड़ जी मुस्कुराए – “तुम लोग साथ हो तो थकान कैसी? तुम्हारी एनर्जी मुझे चलाए रखती है।”
फिर चाय की चुस्कियां, ठहाके, और वो अनकहा भरोसा कि चाहे कुछ भी हो, हम साथ हैं।
दोस्तों, ऐसे पल ही बताते हैं कि राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल नहीं है। ये रिश्तों का खेल है। सम्मान का। और कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ उसी स्कूल के शिक्षक हैं – जहां हर कार्यकर्ता को लगता है, “मैं अकेला नहीं हूं।”
तो आज इतना ही। बस इतना कहूंगा – जब आपका नेता आपको अपनी एनर्जी बोले, तो समझ जाइए, मंजिल दूर नहीं।
जय राजस्थान। जय हिंद।
🙏
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