कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़: झोटवाड़ा में विकास की नई गाथा, खेलों में नया भारत का निर्माण



राजस्थान की राजधानी जयपुर की झोटवाड़ा विधानसभा सीट के विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं। एक समय था जब वे अपनी शूटिंग से देश का नाम रोशन करते थे, और आज वे झोटवाड़ा में विकास की जमीन तैयार कर रहे हैं। एक पूर्व सैनिक, ओलंपिक मेडलिस्ट और अब एक कर्मठ जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी यात्रा प्रेरणादायक है।

झोटवाड़ा में विकास के कामों की रफ्तार तेज

कर्नल राठौड़ ने हाल ही में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए), नगर निगम और एनएचएआई के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी मानसून सीजन से पहले झोटवाड़ा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करना था .

बारिश के मौसम में जलभराव और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने की समस्या हमेशा से एक बड़ा सिरदर्द रही है। इसे देखते हुए कर्नल राठौड़ ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि सड़कों के निर्माण से पहले जल निकासी और सीवरेज सिस्टम को मजबूत किया जाए। उनका कहना था कि जिन सड़कों की खराब हालत का मुख्य कारण जल निकासी की समस्या है, उनका पुनर्निर्माण तभी कराया जाए जब स्थायी जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था हो जाए .

इसके अलावा, यातायात की बढ़ती समस्या को देखते हुए अंडरपास प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने और सेक्टर रोड्स पर जाम से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने पर विशेष जोर दिया गया . यह सिर्फ सरकारी काम नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील प्रशासक की सोच है जो लोगों की दैनिक परेशानियों को समझते हैं।

विकास के लिए बड़ा निवेश

पिछले दिनों कर्नल राठौड़ ने झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र को 113 करोड़ रुपये की बड़ी सौगात दी थी। इस राशि से 55 नई सड़कों के निर्माण की नींव रखी गई है। यह सड़कें न सिर्फ मुख्य मार्गों को जोड़ेंगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की आंतरिक कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेंगी। भम्भोरी, ढांक्या, फतेहपुरा, बेगास, श्यो सिंहपुरा, पांचर, ईडन का बास और जोबनेर जैसे इलाकों में ये सड़कें विकास की नई राह खोलेंगी .

सेना से लेकर खेल के मैदान तक का सफर

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि भारत के गौरव हैं। वह देश के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने आजादी के बाद व्यक्तिगत स्पर्धा में ओलंपिक रजत पदक जीता था। एथेंस 2004 में उनके इस कारनामे ने भारत में शूटिंग के एक नए युग की शुरुआत की .

उनके व्यक्तित्व का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि वह क्रिकेट के भी शौकीन थे। उन्होंने मध्य प्रदेश की रणजी टीम में भी जगह बनाई थी, लेकिन मां के कहने पर और नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) में चयन के कारण उन्होंने क्रिकेट छोड़कर देश की सेवा का मार्ग चुना . सेना में रहते हुए उन्होंने कारगिल युद्ध जैसे ऑपरेशन में हिस्सा लिया और देश की रक्षा की .

खेलों के प्रति समर्पण

आज भी खेल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। वर्तमान में राजस्थान सरकार में खेल मंत्री के रूप में वह प्रदेश में खेलों के बुनियादी ढांचे को विकसित करने में जुटे हैं। हाल ही में जयपुर में आयोजित स्पोर्ट्सस्टार राजस्थान कॉन्क्लेव में उन्होंने कीनोट एड्रेस दिया और राजस्थान को खेलों का हब बनाने की दिशा में विचार रखे .

कर्नल राठौड़ इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि कैसे एक व्यक्ति अनुशासन (सेना), जुनून (खेल) और सेवा (राजनीति) के तीनों क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ सकता है। झोटवाड़ा के लोग उनसे बहुत उम्मीदें लगाए बैठे हैं और वह लगातार उन उम्मीदों पर खरा उतर रहे हैं।


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