कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: जब विपक्ष की आलोचना सिर्फ प्रासंगिक बने रहने की मजबूरी है
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने एक बार फिर से सत्तापक्ष और विपक्ष की मानसिकता पर गहरा प्रहार किया है। उनके बयान ने एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है—क्या कांग्रेस की आलोचना वाकई जवाबदेही तय करने के लिए है, या फिर यह सिर्फ अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बचाने की एक जद्दोजहद है? राठौड़ का कहना है कि जिन लोगों ने परीक्षा पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों को जन्म दिया, वे आज पारदर्शिता का पाठ पढ़ा रहे हैं। यह विडंबना ही है कि जिन्होंने ERCP (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) जैसी अहम योजना को वर्षों ठंडे बस्ते में डाल रखा था, वे आज जल समाधानों पर सवाल उठा रहे हैं। "आपको केवल अख़बार की सुर्खियाँ बटोरने का शौक है, धरातल पर काम करने का नहीं।" यह एक ऐसा वाक्य है जो विपक्ष की वास्तविकता को बयां करता है। आज देश और राजस्थान में डबल इंजन की सरकार का मतलब है—योजनाएं बिना रुकावट लाभार्थियों तक पहुंचें, विकास बिना देरी हो, और व्यवस्था बिना किसी "समझौतावादी परिवार संस्कृति" के चले। जब जनता का जनादेश इतना स्पष्ट हो, तो हंगामा ही विपक्ष की आखिरी रणनीति बनकर रह जाती है। कभी-कभी यह तेज आलोचना दरअसल उस खामोश इं...