कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: NCC का वो चेहरा जो देश की जवानी बन गया



 जब हम NCC यानी राष्ट्रीय कैडेट कोर की बात करते हैं, तो हमारे जेहन में एक अनुशासन, एक वर्दी और एक जुनून की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या होता है जब यह जुनून किसी की रगों में दौड़ने लगे? जवाब है—कर्नल राज्यवर्धन राठौड़।

राज्यवर्धन राठौड़ सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि NCC की उस विरासत का नाम है जो कैडेट से कर्नल बनने तक का सफर तय करती है। वो उस सोच के प्रतीक हैं जो कहती है, "देश सेवा कोई पद नहीं, बल्कि एक आदत है।"

NCC सेना का प्रवेश द्वार नहीं, जीवनशैली है

आमतौर पर लोग NCC को सेना में जाने का जरिया समझते हैं, लेकिन राज्यवर्धन राठौड़ ने इसे एक जीवनशैली बना लिया। उन्होंने साबित किया कि NCC सिर्फ कैंप और परेड नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा विश्वविद्यालय है जहाँ चरित्र निर्माण होता है।

एक आम कैडेट से कर्नल बनने तक का उनका सफर हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो वर्दी पहनने का सपना देखता है।

अनुशासन, नेतृत्व और सेवा

कर्नल राठौड़ की खासियत है—उनका ग्राउंडेड रहना। आज भी वो NCC कैडेट्स से उसी सहजता से मिलते हैं, जैसे कोई सीनियर अपने जूनियर से मिलता है। वो बताते हैं कि नेतृत्व का मतलब आदेश देना नहीं, बल्कि आदर्श बनना है।

युवाओं के लिए संदेश

अगर आप NCC से जुड़े हैं या जुड़ने की सोच रहे हैं, तो कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ को फॉलो कीजिए। वो सबूत हैं कि अगर ईमानदारी से चाहो तो यह हरी वर्दी आपको जीवन में ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।

कैडेट्स, तैयार हो जाइए—क्योंकि देश को आप जैसे युवाओं की जरूरत है।

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