राजस्थान के खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी! कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने अनुदान और नौकरियों के लंबित मामलों पर फूंका गुस्सा, शुरू की निगरानी



जयपुर: राजस्थान के खिलाड़ियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश के खेलमंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अब खिलाड़ियों से जुड़े मामलों को लेकर कमान अपने हाथों में ले ली है। दरअसल, राज्य के मेधावी खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न (बिना वरिष्ठता क्रम के) नौकरी देने और अनुदान राशि के भुगतान में हो रही देरी ने आखिरकार मंत्री जी के गुस्से को हद तक पहुंचा दिया।

हाल ही में सवाई मानसिंह स्टेडियम के दौरे पर खेलमंत्री जब खिलाड़ियों के बीच पहुंचे तो उन्होंने पाया कि प्रशासनिक स्तर पर खिलाड़ियों के साथ अनदेखी हो रही है। खिलाड़ियों ने उन्हें बताया कि न सिर्फ प्रशिक्षक मैदान पर नदारद रहते हैं, बल्कि कर्मचारी भी अपनी सीटों पर नहीं मिलते। सबसे बड़ी समस्या आर्थिक सहायता और नौकरियों को लेकर सामने आई।

कितने मामले हैं लंबित?
आंकड़े चौंकाने वाले हैं। प्रदेश में पदक विजेता खिलाड़ियों को मिलने वाली अनुदान और प्रोत्साहन राशि के 8 हजार से ज्यादा मामले लंबित पड़े हैं। वहीं, आउट ऑफ टर्न नियुक्ति के लिए करीब डेढ़ सौ से अधिक आवेदन धूल फांक रहे हैं।

मंत्री जी का एक्शन प्लान:
खिलाड़ियों की बात सुनने के बाद कर्नल राठौड़ ने तुरंत सख्त रुख अपनाया। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए एक डबल-धमाका किया है:

  1. आईटी टीम की तैनाती: मंत्री के निर्देश पर सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) के 8 तकनीकी रूप से दक्ष कर्मचारियों को राजस्थान खेल परिषद में तैनात किया गया है। इनमें से 6 कर्मचारियों ने मंगलवार को ही स्टेडियम में कार्यभार संभाल लिया। ये टीम लंबित फाइलों का त्वरित निस्तारण कर भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी।

  2. प्रभारी बदला गया: खेलमंत्री ने तत्काल प्रभाव से अनुदान और आउट ऑफ टर्न शाखा के पुराने प्रभारी को हटाकर स्पोर्ट्स मैनेजर नरेंद्र भूरिया को जिम्मेदारी सौंपी है।

  3. स्पेशल सेल: उन्होंने इन मामलों के निपटारे के लिए एक विशेष सेल (स्पेशल सेल) बनाने के भी निर्देश दिए हैं।

कर्नल साहब ने क्या कहा?
खेलमंत्री ने साफ कर दिया है कि सरकार का उद्देश्य खिलाड़ियों को समय पर सम्मान और आर्थिक सहायता पहुंचाना है। उन्होंने कहा, "प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ी राज्य का गौरव हैं और उन्हें प्रोत्साहित करना सरकार की प्राथमिकता है। भविष्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

अब देखना यह होगा कि इस सख्ती का असर कितनी जल्दी जमीन पर दिखता है और कितने खिलाड़ियों के खाते में लंबे समय से अटकी राशि पहुंच पाती है। फिलहाल, खिलाड़ियों को उम्मीद की एक नई किरण जरूर दिखाई दी है।

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