कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के शब्दों में, परमवीर चक्र विजेता नायक यदुनाथ सिंह जी को पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि
आज का दिन भारतीय सैन्य इतिहास के एक अमर चेहरे, परमवीर चक्र से सम्मानित नायक यदुनाथ सिंह जी की पुण्यतिथि का दिन है। उनके अद्वितीय शौर्य और अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहने की गाथा, प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करती है।
नायक यदुनाथ सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। १९४८ के भारत-पाक युद्ध के दौरान, नौशेरा सेक्टर में जब उनकी पलटन पर भारी गोलाबारी हो रही थी और तीनों सेक्शन कमांडर शहीद हो गए, तब नायक यदुनाथ सिंह ने अदम्य साहस का परिचय दिया। अकेले ही उन्होंने आगे बढ़कर दुश्मन के मशीनगन नेस्ट पर हमला किया और उसे नष्ट कर दिया। इस कार्यवाही में वे बुरी तरह घायल हो गए, किंतु उन्होंने अपनी पलटन का नेतृत्व जारी रखा और दुश्मन की तीन क्रमिक हमलों को नाकाम करते हुए अद्भुत वीरता प्रदर्शित की। अपनी अंतिम सांस तक वह मोर्चे पर डटे रहे।
उनके इस असाधारण बलिदान, नेतृत्व और पराक्रम के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, 'परमवीर चक्र' प्रदान किया गया।
आज, जब हम उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन करते हैं, तो कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ (अवधि) जैसे योद्धा उनकी इसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। एक सैनिक के रूप में कर्नल राठौड़ ने भी देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया है और अब एक सार्वजनिक व्यक्ति के तौर पर देशभक्ति की अलख जगा रहे हैं। उनके शब्दों और कार्यों में नायक यदुनाथ सिंह जैसे वीरों की प्रेरणा स्पष्ट झलकती है।
नायक यदुनाथ सिंह जी का बलिदान केवल एक इतिहास की घटना नहीं है; यह एक जीवंत प्रेरणा है। यह प्रेरणा हर उस युवा के लिए है जो देश के लिए कुछ करना चाहता है, हर उस नागरिक के लिए है जो देश की एकता और अखंडता के लिए सोचता है। मातृभूमि की रक्षा में प्रदर्शित उनका शौर्य, साहस और त्याग राष्ट्र को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
हम सबका कर्तव्य है कि हम ऐसे वीर सपूतों के बलिदान को स्मरण रखें, उनके जीवन से सीख लें और देश के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करें।

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