कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: सुशासन की नई परिभाषा, जहां चालान नहीं, सम्मान है असली हथियार



आमतौर पर राजनीति में सुधार की बात होते ही हमारे जेहन में नई योजनाओं के एलान या सरकारी आदेशों की तस्वीर उभरती है। लेकिन जयपुर की सड़कों पर एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने गुरुवार को झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में एक ऐसा प्रयोग किया, जिसने 'सुशासन' (Good Governance) की पारंपरिक परिभाषा को ही बदल कर रख दिया।

जब सड़क पर उतरे युवा:
सिरसी रोड, विजय द्वार और वैशाली चौराहे पर गुरुवार को नजारा कुछ अलग ही था। कर्नल राठौड़, स्थानीय विद्यार्थियों के साथ सड़क पर उतरे। लेकिन वहां न तो कोई सख्ती थी और न ही चालान काटने की मशीनरी। यह एक अभियान था, 'Civic & Traffic Responsibility' नामक एक प्रयोग, जो 'एनफोर्समेंट' (दंड) से हटकर 'एंगेजमेंट' (सहभागिता) की ओर एक कदम था।

पुलिस वाला नहीं, मेंटर वाला अंदाज:
इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि इसमें नियम तोड़ने वालों को सजा देने पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि नियम मानने वालों को प्रोत्साहित किया गया। जो वाहन चालक हेलमेट पहने थे, ट्रैफिक लाइट का पालन कर रहे थे, उनका विद्यार्थियों और कर्नल राठौड़ ने सार्वजनिक रूप से सम्मान किया। यह एक शक्तिशाली संदेश था कि सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करना, नकारात्मक को दंडित करने से कहीं अधिक प्रभावी हो सकता है।

युवाओं के लिए एक व्यावहारिक पाठशाला:
यह अभियान केवल ट्रैफिक सुधार तक सीमित नहीं था। कर्नल राठौड़ ने इसे युवाओं के लिए एक 'लीडरशिप इंटर्नशिप' का रूप दे दिया। विद्यार्थियों ने मौके पर ट्रैफिक प्रबंधन को समझा, आम नागरिकों से संवाद किया और जिम्मेदार नागरिक होने का व्यावहारिक पाठ सीखा।

कर्नल राठौड़ का दृष्टिकोण:
इस मौके पर कर्नल राठौड़ ने कहा, "ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार केवल इंफ्रास्ट्रक्चर से नहीं, बल्कि नागरिक व्यवहार में सकारात्मक बदलाव से संभव है।" उन्होंने आगे कहा कि आज का युवा केवल डिग्री लेकर तैयार नहीं हो जाता। उसे सामाजिक सहभागिता और नेतृत्व का व्यावहारिक अनुभव भी चाहिए। उन्होंने राजस्थान पुलिस एवं गृह विभाग से मांग की कि इसे एक संरचित 'स्टूडेंट पुलिस इंटर्नशिप फ्रेमवर्क' का रूप दिया जाए। इससे जहां युवाओं का रिज्यूमे मजबूत होगा, वहीं पुलिस और समुदाय के बीच विश्वास भी बढ़ेगा।

निष्कर्ष:
सिरसी से वैशाली तक चला यह प्रयोग एक पायलट प्रोजेक्ट है, लेकिन इसकी संभावनाएं बहुत बड़ी हैं। कर्नल राठौड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम भी हो सकती है। यह पहल 'सड़क सुरक्षा' से आगे बढ़कर 'सामाजिक चेतना' और 'युवा निर्माण' की एक मजबूत कड़ी साबित हो रही है। आज ये विद्यार्थी जिस चौराहे पर खड़े हैं, कल वही इस देश के प्रशासक और नीति-निर्माता होंगे।

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