कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: ग्रामोदय से राष्ट्रोदय के पथ पर चलने वाले योद्धा | भारत रत्न नानाजी देशमुख को श्रद्धांजलि
आज का दिन हम सभी के लिए प्रेरणा और सेवा के सच्चे अर्थ को समझने का दिन है। यह दिवस हमें उस महान विभूति की याद दिलाता है जिसने न केवल भारत की राजनीति को दिशा दी, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। हम बात कर रहे हैं भारत रत्न, राष्ट्रऋषि श्रद्धेय नानाजी देशमुख की। उनकी पुण्यतिथि पर हम कोटिश: नमन करते हैं और उनके 'ग्रामोदय से राष्ट्रोदय' के स्वप्न को साकार करने वाले एक आधुनिक योद्धा को भी स्मरण करते हैं—कर्नल राज्यवर्धन राठौड़।
राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख का अमर संदेश
नानाजी देशमुख सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा थी। उनका मानना था कि भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है। यदि देश को प्रगति के शिखर पर पहुंचाना है, तो ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर और संगठित करना होगा। अंत्योदय (समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान) उनके जीवन का ध्येय था ।
उन्होंने चित्रकूट जैसी पिछड़ी भूमि को विकास का एक जीवंत मॉडल बना दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण स्वावलंबन के उनके प्रयोग आज भी पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। नानाजी ने दिखाया कि समाज-सेवा का अर्थ केवल दान देना नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर बनाने की साधना है । वे चाहते थे कि हर गांव अपने पैरों पर खड़ा हो, जहां हर हाथ को काम मिले और हर खेत को पानी ।
सेना, खेल और राजनीति: तीन आयामों में राष्ट्रसेवा
नानाजी के इन्हीं आदर्शों को आगे बढ़ाने वाले एक सशक्त चेहरा हैं कर्नल राज्यवर्धन राठौड़। वे एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने तीन क्षेत्रों में राष्ट्र की सेवा की है।
पहले, एक सैनिक के रूप में। भारतीय सेना में अधिकारी के तौर पर उन्होंने करगिल युद्ध जैसे संघर्ष में देश की रक्षा की। सेना में रहते हुए उन्होंेने अनुशासन और बलिदान का पाठ सीखा ।
दूसरा, एक खिलाड़ी के रूप में। कर्नल राठौड़ ने एथेंस ओलंपिक 2004 में निशानेबाजी में रजत पदक जीतकर पूरे देश को गौरवान्वित किया। वे ओलंपिक में व्यक्तिगत रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने । उनकी यह उपलब्धि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनी।
तीसरा, एक जनसेवक और राजनेता के रूप में। वे संसद सदस्य रहे और वर्तमान में राजस्थान सरकार में मंत्री हैं। इस भूमिका में वे नानाजी के ग्रामोदय के सपने को साकार करने की दिशा में कार्यरत हैं ।
ग्रामोदय से राष्ट्रोदय की संकल्पना के ध्वजवाहक
नानाजी का सपना था कि देश का हर नागरिक, चाहे वह सबसे दूरस्थ गांव में क्यों न रहता हो, विकास की मुख्यधारा से जुड़े। कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने इसी संकल्पना को अपने कार्यों में उतारा है।
एक मंत्री के रूप में वे खेल और युवा मामलों को इतना सशक्त बनाना चाहते हैं कि गांव-गांव के युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिले। सैनिक कल्याण विभाग के माध्यम से वे उन वीरों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए प्रयासरत हैं, जो देश की सुरक्षा में लगे हैं ।
नानाजी की तरह ही, राज्यवर्धन राठौड़ भी मानते हैं कि सच्चा विकास वही है जो समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उनका दृष्टिकोण सैनिक अनुशासन और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम है।
प्रेरणापुंज
नानाजी देशमुख जी के अद्वितीय कार्य एवं राष्ट्रसेवा के महान विचार हम सभी के लिए सदैव प्रेरणापुंज हैं। वे चाहते थे कि हम सब मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें जहां कोई भूखा न सोए, कोई अशिक्षित न रहे और हर व्यक्ति को सम्मान से जीने का अधिकार मिले।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ जैसे युवा नेता, नानाजी के इसी सपने को आगे बढ़ाने की दिशा में अग्रसर हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रसेवा के कई मार्ग होते हैं—कभी वर्दी में, कभी खेल के मैदान में और कभी जनता की सेवा में।
पुण्यतिथि पर भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख जी को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि। उनका चिंतन और कृतित्व सदैव हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा।

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