कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: सिग्नल से सिस्टम तक - झोटवाड़ा में सड़कों पर दिखी असली नेतृत्व की तस्वीर
डेटा से नेतृत्व तक: एक अनूठा प्रयोग
राजस्थान के कैबिनेट मंत्री और झोटवाड़ा के विधायक, कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने हाल ही में प्रशासन को एक नई दिशा दी है। अक्सर नेता सिर्फ फाइलों पर दस्तखत करके संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन कर्नल साहब ने सड़क पर उतरकर दिखा दिया कि असली सुधार का मतलब क्या होता है। रात के 12 बजे, बाइक पर सवार होकर उन्होंने झोटवाड़ा की सड़कों का निरीक्षण किया और डेढ़ घंटे तक जलभराव और टूटी सड़कों की समस्या को करीब से देखा ।
सजा नहीं, समाधान है लक्ष्य
उनका यह निरीक्षण कोई औपचारिकता नहीं थी। उन्होंने देखा कि कैसे पुरानी सरकारों ने सिर्फ डामर (टार) की परत चढ़ाकर लोगों को धोखा दिया, जो बारिश में बह जाती थी। इस निरीक्षण के तुरंत बाद उन्होंने ऐलान किया कि अब केवल "एक्शन" नहीं, बल्कि एक सिस्टम तैयार किया जाएगा। उन्होंने जो पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया, वह महज सड़क बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि एक ऐसी संस्थागत संरचना तैयार करना था जो भविष्य में खुद ही समस्याओं का समाधान कर सके।
ट्रैफिक जाम से प्रेरणा: इंटर्नशिप का अनोखा आइडिया
इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि ट्रैफिक व्यवस्था सिर्फ पुलिस या विभाग का काम नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक दायित्व है। उन्होंने एक क्रांतिकारी सुझाव दिया - छात्र-पुलिस इंटर्नशिप कार्यक्रम। में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, झोटवाड़ा में करोड़ों रुपए की परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन कर्नल राठौड़ चाहते हैं कि युवा भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनें।
भविष्य की संरचना आज बन रही है
"सिग्नल से सिस्टम" तक का यह सफर बताता है कि कैसे एक सड़क किनारे खड़ा नेता, ट्रैफिक की समस्या को देखकर एक राष्ट्र निर्माण का मॉडल तैयार कर सकता है। जो चीज आज सड़क पर एक कार्रवाई (स्ट्रीट एक्शन) है, कल वही सरकारी नीति (रिफॉर्म कॉल) में बदल जाएगी। उनका ₹152 करोड़ का ट्रैफिक प्रोजेक्ट और आठ अंडरपास की योजना इस बात का सबूत है कि वे झोटवाड़ा को सिर्फ एक कॉलोनी नहीं, बल्कि एक मॉडल सिटी के रूप में देख रहे हैं

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