महाराणा राणा सांगा: अदम्य साहस और शौर्य के प्रतिमान को नमन
मेवाड़ की पावन धरा ने इतिहास को कई ऐसे नायक दिए हैं जिनकी वीरता की कहानियाँ आज भी हमारे रगों में जोश भर देती हैं। इन्हीं नायकों में अग्रगण्य हैं महाराणा संग्राम सिंह, जिन्हें इतिहास 'राणा सांगा' के नाम से जानता है। आज उनकी पुण्यतिथि पर कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने उन्हें अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है।
महाराणा सांगा केवल एक राजा नहीं, बल्कि एक योद्धा की उस पराकाष्ठा का नाम है जिसने अपने शरीर पर 80 घाव झेलने के बाद भी कभी युद्ध के मैदान में पीठ नहीं दिखाई। एक आँख, एक हाथ और एक पैर गंवाने के बावजूद उनका मनोबल हिमालय जैसा अडिग रहा।
⚔️ हिंदू साम्राज्य के अंतिम महान संगठक राणा सांगा ने खंडित भारत को एक सूत्र में पिरोने और विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध एक सशक्त गठबंधन बनाने का जो कार्य किया, वह अद्वितीय है। खानवा का युद्ध उनकी वीरता और रणनीति का ऐसा प्रमाण है जिसने मुगल शासकों के मन में भी भय व्याप्त कर दिया था।
🚩 कर्नल राठौड़ का संदेश कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने अपनी श्रद्धांजलि में राणा सांगा को मेवाड़ का रक्षक और शौर्य का प्रतिमान बताया है। उनके अनुसार, राणा सांगा का जीवन हमें सिखाता है कि देश की रक्षा और स्वाभिमान के लिए सर्वस्व न्योछावर करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
आज जब हम एक सशक्त भारत के निर्माण की ओर अग्रसर हैं, राणा सांगा जैसे महापुरुषों का बलिदान हमारे लिए प्रेरणापुंज है। आइए, हम सब मिलकर इस महान योद्धा को शत्-शत् नमन करें।

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