अजेय वीरता के प्रतीक: 'हाइफा हीरो' मेजर दलपत सिंह जी को शत्-शत् नमन
आज हम उस महान सेनानी को याद कर रहे हैं जिनकी तलवार की खनक ने सात समंदर पार रेगिस्तान की रेत में इतिहास लिख दिया था। राजस्थान के सपूत और भारतीय सेना के अदम्य साहस के प्रतीक मेजर दलपत सिंह शेखावत की जयंती पर, कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने उन्हें कोटि-कोटि नमन किया है।
मेजर दलपत सिंह जी का नाम केवल इतिहास के पन्नों में ही नहीं, बल्कि इजरायल के शहर हाइफा की हवाओं में भी गूंजता है। उन्हें 'हाइफा हीरो' के रूप में जाना जाता है, क्योंकि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने जो किया, वह अकल्पनीय था।
⚔️ हाइफा विजय: जब तलवारें तोपों पर भारी पड़ीं
23 सितंबर 1918 को हाइफा (इजरायल) की लड़ाई में जोधपुर लांसर्स का नेतृत्व करते हुए मेजर दलपत सिंह ने वह पराक्रम दिखाया जो सैन्य इतिहास में विरले ही मिलता है।
अद्वितीय साहस: एक ओर जर्मन और तुर्क सेना मशीनगनों और तोपों से लैस थी, तो दूसरी ओर मेजर दलपत सिंह और उनके वीर घुड़सवार केवल तलवारों और भालों के दम पर आगे बढ़े।
रणकौशल: मेजर दलपत सिंह ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन की मशीनगनों को खामोश कर दिया और हाइफा शहर को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराया।
वीरगति: इसी भीषण संघर्ष के दौरान वे वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन उनकी वीरता ने भारतीय सेना का मस्तक पूरे विश्व में ऊंचा कर दिया।
🇮🇳 राष्ट्रभक्ति की चिरस्थायी प्रेरणा
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने अपनी श्रद्धांजलि में सही कहा है कि मेजर दलपत सिंह जी का पराक्रम सदैव राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। आज दिल्ली का प्रसिद्ध 'तीन मूर्ति हाइफा चौक' उन्हीं जांबाज सैनिकों की याद दिलाता है।
उनकी जयंती पर हमारा संकल्प होना चाहिए कि हम उनके शौर्य की गाथाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ। मेजर दलपत सिंह जी जैसे नायकों के कारण ही आज विश्व भारत की सैन्य शक्ति का सम्मान करता है।

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