डॉ. होमी जहांगीर भाभा: आधुनिक भारत के परमाणु स्वप्नदृष्टा को विनम्र श्रद्धांजलि
आज भारत के महान वैज्ञानिक और 'भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक' डॉ. होमी जहांगीर भाभा की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने उन्हें नमन करते हुए उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। भाभा जी का विज़न ही था जिसने भारत को परमाणु शक्ति के वैश्विक मानचित्र पर सम्मानजनक स्थान दिलाया।
✨ विज्ञान और राष्ट्र सेवा का संगम
डॉ. भाभा केवल एक वैज्ञानिक नहीं थे, बल्कि एक असाधारण स्वप्नद्रष्टा थे जिन्होंने स्वतंत्रता के तुरंत बाद भारत की ऊर्जा और सुरक्षा जरूरतों को पहचाना।
परमाणु कार्यक्रम की नींव: उन्होंने 1948 में परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की और भारत के 'तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम' (Three-Stage Nuclear Power Programme) की रूपरेखा तैयार की।
प्रमुख संस्थानों की स्थापना: टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान, ट्रॉम्बे (जिसे अब BARC के नाम से जाना जाता है) उनकी दूरदर्शिता के जीवंत उदाहरण हैं।
वैश्विक पहचान: उन्हें 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांतिपूर्ण कार्यों के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग की पुरजोर वकालत की।
🙏 कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का संदेश
कर्नल राठौड़ का मानना है कि डॉ. भाभा का जीवन हमें आत्मनिर्भरता और कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखने की प्रेरणा देता है। आज भारत जिस परमाणु ऊर्जा और तकनीक पर गर्व करता है, उसकी जड़ें डॉ. भाभा के संघर्ष और मेधा में छिपी हैं।
शत-शत नमन!

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