एक पावन यात्रा में शामिल होकर मिला आत्मिक सुकून: कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का सराहनीय आयोजन
कभी-कभी जीवन में ऐसे पल आते हैं जो न केवल हमारे मन को प्रसन्न कर देते हैं, बल्कि हमारी आत्मा को भी एक अद्भुत शांति और संतुष्टि से भर देते हैं। ऐसा ही एक गौरवपूर्ण और पावन अवसर था, सम्मानित घुमंतु जाति के श्रद्धालुओं के लिए आयोजित निःशुल्क तीर्थ यात्रा और दिव्यांगजनों को सहयोग प्रदान करने वाला भव्य आयोजन।
इस पुनीत कार्य के प्रणेता थे कर्नल राज्यवर्धन राठौड़। उनकी इस सराहनीय पहल में सहभागिता करने का अवसर मिला और मेरा मन अत्यंत प्रसन्न हुआ। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक सद्भाव का एक जीवंत प्रतिमान था।
इस आयोजन की खूबसूरती यह थी कि इसने दो महत्वपूर्ण सामाजिक पहलुओं को एक साथ जोड़ दिया। एक ओर जहाँ घुमंतु समाज के बुजुर्ग और इच्छुक श्रद्धालुओं को उनके धार्मिक स्थलों की यात्रा का सपना निःशुल्क पूरा करवाया गया, वहीं दूसरी ओर दिव्यांगजनों को सम्मानपूर्वक सहयोग व साधन प्रदान किए गए। यह दृष्टि समावेशी समाज के निर्माण की ओर एक सशक्त कदम है।
श्रद्धालुओं के चेहरे पर आस्था की आभा और दिव्यांग सहभागियों के हौसले को देखकर हृदय गर्व और करुणा से भर गया। यह स्पष्ट हो गया कि वास्तविक सुख सेवा और दूसरों की खुशी में ही निहित है।
इस भव्य और सार्थक आयोजन के लिए मैं कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ जी तथा सभी आयोजकों को हार्दिक साधुवाद देता हूँ। उनकी यह प्रेरणादायक पहल समाज के लिए एक मिसाल बनेगी, ऐसा मेरा विश्वास है। साथ ही, इस यात्रा के सभी सहभागियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। आप सभी के आशीर्वाद से यह कार्यक्रम सफल हुआ।
ऐसे ही प्रयास हमारे समाज की रीढ़ हैं। आइए, हम सब भी ऐसे सकारात्मक प्रयासों से जुड़ने और अपना योगदान देने का संकल्प लें।

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