कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ - कल बच्चों के साथ बिताए गए कुछ बेहद खास पल
हैलो दोस्तों!
कल का दिन वाकई बहुत ही खास था। जयपुर में हमारे सांसद और पूर्व ओलंपियन कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सर ने कुछ समय स्थानीय स्कूल के बच्चों के साथ बिताया। यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक सहज, हृदय से निकला हुआ संवाद था।
मैं वहाँ मौजूद था और उन पलों को महसूस कर पा रहा था। कर्नल साहब, जिनकी छवि एक दृढ़ सैनिक और कड़े अनुशासन वाले खिलाड़ी की है, उन्होंने बच्चों के सामने एक सहज शिक्षक और एक बड़े भाई की भूमिका निभाई।
बच्चे, जो पहले थोड़े संकोच में थे, जल्दी ही उनकी मुस्कान और सरलता से इतने सहज हो गए कि सवालों की झड़ी लग गई। "आपने पहली बार बंदूक कब उठाई?", "ओलंपिक में मेडल जीतने पर कैसा लगा?", "डर नहीं लगता क्या?"
और कर्नल साहब ने हर सवाल का जवाब बड़े ही प्यार और धैर्य से दिया। उन्होंने सिर्फ शूटिंग की तकनीक के बारे में नहीं, बल्कि अनुशासन, लक्ष्य निर्धारण और हार से सीखने के बारे में बात की। उनकी बातों में जीवन के पाठ छिपे थे। एक बच्चे ने पूछा, "असफलता से कैसे निपटें?" तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "असफलता तो वह तीर है जो तुम्हें दिखाती है कि तुम्हारा निशाना कहाँ नहीं है। फिर से निशाना लगाओ!"
सबसे यादगार पल था जब उन्होंने प्रैक्टिकल डेमो दिया। उन्होंने बच्चों को शूटिंग का सही स्टांस, पोस्चर और फोकस करने का तरीका बताया। बच्चों की आँखों में चमक देखने लायक थी। यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि मन की एकाग्रता का पाठ था।
कुल मिलाकर, यह अनुभव बच्चों के लिए ही नहीं, हम सबके लिए प्रेरणादायी था। यह दिखाता है कि जब कोई हीरो अपने पद और हैसियत से ऊपर उठकर बच्चों से जुड़ता है, तो वह उनके सपनों को पंख दे देता है। उम्मीद है, इनमें से कई बच्चे आगे चलकर देश का नाम रोशन करेंगे।
क्या आपके साथ भी कभी किसी प्रेरणादायक शख्सियत से मिलने का ऐसा अनुभव हुआ है? कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें।
धन्यवाद!

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