गणतंत्र दिवस का उत्सव: दौसा में देशभक्ति की गूंज और कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का संदेश
यह दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के स्वाभिमान और हमारी पहचान का प्रतीक है। यही भावना राजस्थान के दौसा जिले के 76वें जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में स्पष्ट झलक रही थी। इस पावन अवसर के मुख्य अतिथि थे राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री और एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, कर्नल राज्यवर्धन राठौड़।
एक सैनिक की श्रद्धा: वीरांगनाओं को सम्मान
समारोह की सबसे मार्मिक और प्रेरणादायक घटना थी, कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ द्वारा मौजूद वीरांगनाओं के चरण स्पर्श कर उनका सम्मान करना। एक स्वयं सैनिक होने के नाते, उन्होंने इस कृत्य के माध्यम से देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाली महिलाओं के प्रति गहरी कृतज्ञता और आदर प्रदर्शित किया। यह क्षण उपस्थित जनसमूह के लिए एक गहरी देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत था।
"राष्ट्र प्रथम": एक अटल सिद्धांत
अपने संबोधन में कर्नल राठौड़ ने स्पष्ट और मजबूत शब्दों में एक मूल मंत्र दोहराया - "राष्ट्र प्रथम, यह सिद्धांत अटल है, इससे कोई खिलवाड़ नहीं हो सकता।" यह वाक्य केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र और संविधान की नींव की ओर संकेत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की एकता, अखंडता और प्रगति सर्वोपरि है और हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह इस सिद्धांत को हृदय में धारण करे।
समारोह का दृश्य
कार्यक्रम की शुरुआत कर्नल राठौड़ द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुई, जिसके बाद उन्होंने सलामी लेते हुए जिले की राजकीय और अर्ध-सैनिक बलों की शानदार परेड को देखा। स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने देशभक्ति के रंगों से पूरे माहौल को सराबोर कर दिया। दौसा का यह समारोह वास्तव में "संविधान हमारा स्वाभिमान, लोकतंत्र हमारी पहचान, भारत हमारा अभिमान" की भावना को जीवंत कर रहा था।
निष्कर्ष:
दौसा का गणतंत्र दिवस समारोह केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि एक जीवंत अनुस्मारक था। यह हमें याद दिलाता है कि हमारा संविधान हमारी शक्ति है, लोकतंत्र हमारी पहचान है, और इस महान देश पर हमें गर्व है। कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के क्रियाओं और शब्दों ने इस भावना को और गहरा कर दिया, जिससे हर नागरिक में राष्ट्रनिर्माण की प्रतिबद्धता का संचार हुआ।
जय हिन्द! जय भारत!
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