मर्यादा और सम्मान का संगम: जब कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने मंच पर शहीद वीरांगना के पैर छुए

 

दौसा में आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में एक ऐसा क्षण आया जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों को नम कर दिया और गौरव से भर दिया। राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री और दौसा के प्रभारी मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने न केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराया, बल्कि भारतीय संस्कृति और सेना के संस्कारों का परिचय देते हुए मंच पर एक शहीद वीरांगना के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।

संस्कारों वाली राजनीति

एक पूर्व सैन्य अधिकारी होने के नाते कर्नल राठौड़ जानते हैं कि एक सैनिक का परिवार देश के लिए क्या बलिदान देता है। समारोह के दौरान जब वीरांगनाओं को सम्मानित करने का समय आया, तो मंत्री जी ने औपचारिकता से ऊपर उठकर वीरांगना के चरण स्पर्श किए। यह दृश्य 'राष्ट्र प्रथम' के उस सिद्धांत का जीवंत उदाहरण था जिसे कर्नल राठौड़ हमेशा दोहराते हैं।

लोकतंत्र की मजबूती पर बड़ा बयान

अपने संबोधन में कर्नल राठौड़ ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संविधान की ताकत पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा:

"भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जीवंत लोकतंत्र है। पिछले 12 वर्षों में एक बार भी देश में ऐसी स्थिति नहीं आई कि राष्ट्रपति शासन लगाने की आवश्यकता पड़े। यह हमारे संविधान की सुरक्षा और देश की लोकतांत्रिक परिपक्वता का सबसे बड़ा प्रमाण है।"

उन्होंने दौसा के औद्योगिक विकास और युवाओं के लिए खेल सुविधाओं (जैसे नया क्रिकेट ग्राउंड) पर भी बल दिया। यह समारोह केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि देशभक्ति और संवेदनाओं का उत्सव बन गया।

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