एक युग का अंत: पूज्य गुरुदेव श्री रामदास महाराज जी का गोलोक गमन
आज का दिन आध्यात्मिक जगत के लिए अत्यंत शोक और विषाद से भरा हुआ है। लुधावई मंदिर के महंत, पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 श्री महामंडलेश्वर श्री रामदास महाराज जी के गोलोक गमन का समाचार अत्यंत दुःखद और हृदयविदारक है। यह न केवल एक संत का देहावसान है, बल्कि एक युग का अंत है, एक ऐसे प्रकाश-स्तंभ का अस्त होना है जिसने असंख्य जीवनों को आलोकित किया।
पूज्य गुरुदेव का सम्पूर्ण जीवन साधना, सेवा और करुणा का जीवंत उदाहरण रहा। उनकी वाणी में वेदों का ज्ञान समाहित था और कर्म में निस्वार्थ सेवा का भाव। सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान अमूल्य और अविस्मरणीय है। उन्होंने केवल उपदेश ही नहीं दिए, बल्कि अपने जीवन से यह प्रमाणित किया कि सच्चा आध्यात्मिक जीवन क्या होता है।
उनकी शिक्षाएँ केवल शब्द नहीं थीं; वे जीवन जीने की कला थीं। उनके द्वारा स्थापित संस्कार, दी गई शिक्षा और प्रदान किए गए आशीर्वाद उनके लाखों शिष्यों व भक्तों की स्मृतियों में सदैव अमिट रहेंगे। वे एक ऐसे वटवृक्ष थे जिसकी छाया में अनगिनत लोगों ने शांति, ज्ञान और आध्यात्मिक तृप्ति पाई।
इस कठिन समय में, हमारी हार्दिक संवेदना उनके समस्त शिष्य परिवार, भक्तगण और लुधावई मंदिर परिवार के साथ है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को परमधाम में स्थान प्रदान करें, उनकी आत्मा को शांति मिले और उनके अनुयायियों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने का धैर्य, संबल और मार्गदर्शन प्रदान करें।
पूज्य गुरुदेव शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा दिया गया ज्ञान का दीपक, सेवा का भाव और करुणा का सागर सदैव उनके विशाल अनुयायी समुदाय का मार्गदर्शन करता रहेगा। ॐ शांति।
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