सेवा का संकल्प: कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने नए डॉक्टरों को दिया यह संदेश
जयपुर के आर.एल. स्वर्णकार ऑडिटोरियम में एक ऐतिहासिक और गौरवशाली पल देखने को मिला। महात्मा गांधी मेडिकल यूनिवर्सिटी के आठवें दीक्षांत समारोह में 835 से अधिक विद्यार्थियों ने अपनी मेहनत और लगन का फल पाते हुए डिग्रियां प्राप्त कीं। लेकिन इस समारोह की सबसे बड़ी प्रेरणा थी मुख्य अतिथि, पद्मश्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का वह संदेश, जो नए स्वास्थ्य योद्धाओं के मन-मस्तिष्क में हमेशा के लिए अंकित हो गया।
कर्नल राठौड़, जो खुद एक सैन्य वीर और प्रशासनिक क्षमता के धनी हैं, ने कहा कि "चिकित्सक बनना अपने आप में सौभाग्य की बात है, क्योंकि इसके माध्यम से पीड़ित मानवता की सेवा का अवसर मिलता है।" उन्होंने आगे कहा कि यह डिग्री एक मजबूत नींव है, जिस पर खड़े होकर एक कुशल और संवेदनशील चिकित्सक का निर्माण होता है। यह केवल पेशा नहीं, बल्कि एक तपस्या है।
विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. विकास चंद्र स्वर्णकार ने भी इसी भावना को दोहराते हुए कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ डिग्रियां बांटना नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदार, नैतिक और संवेदनशील स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करना है।
इस समारोह में चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, पैरामेडिकल सहित विभिन्न स्वास्थ्य विज्ञान और प्रबंधन संकायों के विद्यार्थियों ने उपाधियां प्राप्त कीं। 34 मेधावी विद्यार्थियों को उनकी विशिष्ट उपलब्धि के लिए स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। डॉ. आदित्य गोयल, डॉ. आकाश जैन, डॉ. सुलेखा, डॉ. गौरव जैसे नाम इस सफलता की गवाही दे रहे थे।
यह दिन न केवल एक समारोह था, बल्कि एक सेवा और करुणा के नए अध्याय की शुरुआत थी। जब ये नव-स्नातक अपनी क्लीनिकल ड्यूटी पर जाएंगे, तो उनके साथ सिर्फ उनका ज्ञान ही नहीं, बल्कि यह जिम्मेदारी का एहसास भी होगा कि उन्हें समाज ने जो दिया है, अब उसे वापस लौटाने का समय आ गया है।
हम सभी नए डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों को उनके इस पवित्र सफर के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं। आपका योगदान ही समाज को स्वस्थ और मजबूत बनाएगा।

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