कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ - ख़ुशी और उल्लास का पर्याय, एक जीवंत प्रेरणा
हमारे जीवन में कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं जो सिर्फ अपने कार्यों से ही नहीं, बल्कि अपने जीने के ढंग से भी समाज को एक नई दिशा दे जाते हैं। कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ऐसे ही एक दिवंगत सेना अधिकारी, पैरा-एथलीट और प्रेरणास्रोत थे, जिन्होंने 'जीवन' को नए सिरे से परिभाषित किया।
उनका जीवन साधारण नहीं था। सेना में बहादुरी से सेवा देने के बाद, एक दुर्घटना ने उन्हें व्हीलचेयर तक सीमित कर दिया। लेकिन क्या यही उनकी कहानी का अंत था? बिल्कुल नहीं। बल्कि यही से शुरू हुई उनकी असली जीत की यात्रा।
कठिनाई में भी मुस्कान कैसे बनाए रखें?
कर्नल राठौड़ ने हमें यही सिखाया कि परिस्थितियाँ हमारी ख़ुशी का निर्धारण नहीं करतीं, बल्कि हमारी सोच करती है। व्हीलचेयर पर रहते हुए भी उन्होंने पैरा-बैडमिंटन खेला, मैराथन दौड़े, और देश का नाम रोशन किया। उनकी आँखों में एक विशेष चमक और चेहरे पर एक मृदु मुस्कान हमेशा बनी रहती थी। यह मुस्कान उनकी अदम्य इच्छाशक्ति की गवाह थी।
"अभी, इसी पल" में जीना:
उनका दर्शन सरल था - भूतकाल के दुखों या भविष्य की चिंताओं में जीवन बर्बाद मत करो। जो पल आपके सामने है, उसे पूरी खुशी और जोश के साथ जियो। चाहे वह एक कप चाय का आनंद हो, किसी मित्र से बातचीत हो, या फिर अपने लक्ष्य के लिए प्रयास करना हो। उन्होंने हर छोटी सफलता, हर छोटे पल का जश्न मनाना सिखाया।
हम क्या सीख सकते हैं?
दृष्टिकोण ही सब कुछ है: आप जिस नज़रिये से दुनिया को देखते हैं, दुनिया वैसी ही दिखती है। सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं।
लचीलापन (Resilience) ही वास्तविक शक्ति है: गिरना महत्वपूर्ण नहीं है, बिना उदास हुए, खुशी से वापस उठ खड़े होना महत्वपूर्ण है।
सेवा में ही सुख है: अपने से बड़े उद्देश्य, जैसे देशसेवा या दूसरों की मदद करने में, सच्ची आंतरिक खुशी मिलती है।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत एक जीती-जागती मशाल है। वह हमें याद दिलाते हैं कि खुशी कोई मंज़िल नहीं है, बल्कि रास्ता है। और यह रास्ता हम अभी, इसी पल चुन सकते हैं।
आइए, उनके जीवन दर्शन को अपनाकर, हर पल को उत्साह और आनंद से भर दें। क्योंकि जीवन बहुत छोटा है, इसे गमगीन करके बिताने के लिए नहीं।
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