कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ की कलम से: महान क्रांतिकारी अमर शहीद सरदार उधम सिंह जी की जयंती पर विशेष
आदरणीय पाठकगण,
आज का दिन भारतीय इतिहास के एक ऐसे सूर्य को याद करने का दिन है, जिसकी किरणों ने अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला दी थी। आज हम सब भारत माता के उस अमर सपूत, महान क्रांतिकारी और प्रतिशोध की प्रतिमूर्ति सरदार उधम सिंह जी की जयंती मना रहे हैं। इस पावन अवसर पर, मैं कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, उनके त्याग, बलिदान और अटूट देशभक्ति को कोटि-कोटि नमन करता हूं।
सरदार उधम सिंह का जीवन एक ऐसी गाथा है, जो बताती है कि एक व्यक्ति का दृढ़ संकल्प इतिहास का रुख कैसे बदल सकता है। 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड ने न केवल सैकड़ों निर्दोष भारतीयों का खून बहाया, बल्कि एक युवा उधम सिंह के मन में औपनिवेशिक अत्याचार के प्रति प्रतिशोध की अमिट ज्वाला भी जला दी। उन्होंने उस दिन प्रतिज्ञा ली थी कि वह इस नरसंहार के मुख्य जिम्मेदार, माइकल ओ'ड्वायर से न्याय लेकर रहेंगे।
और फिर 21 साल की लंबी, कष्टप्रद यात्रा के बाद, 1940 में लंदन के कैक्सटन हॉल में उन्होंने वह ऐतिहासिक कार्य किया, जिसने पूरी दुनिया को दिखा दिया कि भारत की आज़ादी की आकांक्षा को दबाया नहीं जा सकता। उनकी गिरफ्तारी और बाद में फांसी ने उन्हें शहीद बना दिया, लेकिन उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक ज्वलंत चिंगारी बन गया।
आज के दौर में, जब हम आराम से जीवन जी रहे हैं, उधम सिंह जी का जीवन हमें यह याद दिलाता है कि यह आज़ादी कितने संघर्ष और बलिदान की कीमत पर मिली है। वह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि न्याय, साहस और राष्ट्रप्रेम के प्रतीक हैं।
इस जयंती पर, केवल श्रद्धासुमन अर्पित करना ही काफी नहीं है। हमें उनके जीवन के मूल्यों - दृढ़ता, साहस और अपने सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा को अपने जीवन में आत्मसात करने का प्रयास करना चाहिए। हमें अपने देश के लिए जिम्मेदार नागरिक बनकर, उसके विकास में योगदान देकर ही उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।
अमर शहीद सरदार उधम सिंह जी अमर रहें!
भारत माता की जय!
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़

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