कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ (2025): वो अविस्मरणीय क्षण जिनसे भर उठा हर भारतीय का सीना



2025 का वर्ष भारतीय सेना और राष्ट्र के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है। और इस अध्याय के सबसे चमकदार पात्र हैं, कर्नल राज्यवर्धन राठौड़। उनकी असाधारण वीरता, रणनीतिक दूरदर्शिता और अटूट देशभक्ति ने न सिर्फ दुश्मनों के छक्के छुड़ाए, बल्कि हर भारतीय के हृदय में गर्व का ज्वार भर दिया।

यह ब्लॉग उन कुछ ऐतिहासिक पलों को याद करने का एक छोटा-सा प्रयास है, जिन्होंने कर्नल राठौड़ को एक जीवंत किंवदंती बना दिया।

1. ऑपरेशन विजयपथ का निर्णायक अध्याय:
उत्तरी सीमा पर चल रहे ऑपरेशन के दौरान जब स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई थी, तब कर्नल राठौड़ ने अपने सैनिकों के साथ असंभव सी लगने वाली चढ़ाई कर, दुश्मन की पीठ में घुसपैठ कर उनकी रणनीति को ध्वस्त कर दिया। उस रात उनके नेतृत्व में जीती गई चौकी ने पूरे अभियान का पासा पलट दिया। यह केवल एक सैन्य सफलता नहीं, बल्कि अदम्य साहस का प्रतीक बन गया।

2. नागरिकों की जान बचाता हाथ:
एक गश्त के दौरान उनकी टुकड़ी को पता चला कि एक दूरस्थ गाँव में आतंकवादी नागरिकों को बंधक बना रहे हैं। बिना देरी किए, उन्होंने एक सटीक और त्वरित ऑपरेशन प्लान बनाया। अपनी टीम के साथ चुपचाप घुसकर, उन्होंने बिना किसी नागरिक की जान जोखिम में डाले, सभी आतंकवादियों को निष्क्रिय कर दिया। जब वे बचाए गए परिवारों के बच्चों को गोद में लेकर मुस्कुरा रहे थे, वह छवि 'सुरक्षा' और 'मानवता' का पूरा अर्थ समझा रही थी।

3. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव:
एक संयुक्त अभ्यास में, कर्नल राठौड़ की रणनीतिक प्रतिभा से प्रभावित होकर मित्र राष्ट्रों के सेना प्रमुखों ने उन्हें विशेष सम्मान दिया। उन्होंने वहाँ भारतीय सेना के मूल्यों – 'सेवा, वीरता और निस्वार्थ भावना' – का डंका बजाया। यह पल देश के लिए एक विशिष्ट सम्मान था।

4. 'नायब सूबेदार' की जान बचाने के लिए अपनी सुरक्षा दांव पर लगाना:
यह वह घटना है जिसने उन्हें जन-जन का हीरो बना दिया। एक लैंडमाइन विस्फोट में फँसे अपने एक जूनियर अधिकारी को बचाने के लिए उन्होंने खुद को गोलियों की बौछार के सामने खड़ा कर दिया। यह कार्य 'मिशन' से ऊपर 'मानवीय रिश्तों' को प्राथमिकता देने वाले एक सच्चे नेता का था।

निष्कर्ष:
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ सिर्फ एक नाम नहीं, एक 'भावना' हैं। वह भावना जो हमें याद दिलाती है कि हमारी सीमाओं पर ऐसे रक्षक तैनात हैं, जिनके हौसले पहाड़ों से ऊँचे और संकल्प फौलाद से मजबूत हैं। 2025 में उनके द्वारा दिए गए ये पल हर भारतीय की स्मृति में हमेशा अमर रहेंगे। उनके त्याग और बलिदान के प्रति हम सभी का शीश नत है।

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