कर्नल राज्यवर्धन राठौड़: 2 साल, 200+ परीक्षाएँ और 0 पेपर लीक – युवाओं के भरोसे की नई सुबह
राजस्थान के इतिहास में पिछले कुछ साल युवाओं के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे थे। परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य 'पेपर लीक' की भेंट चढ़ जाता था। लेकिन, कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ और वर्तमान सरकार के नेतृत्व में पिछले 2 वर्षों में राजस्थान ने एक ऐसा मानक स्थापित किया है, जिसने राज्य की छवि को पूरी तरह बदल दिया है।
🚀 आंकड़ों में विश्वास: 200+ परीक्षाएँ, शून्य लीक
सरकार का संकल्प था कि मेहनत करने वाले युवा को उसका हक मिलना चाहिए। पिछले दो वर्षों में 200 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं का सफल आयोजन इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से सिस्टम को सुधारा जा सकता है।
कड़ी निगरानी और तकनीक: कर्नल राठौड़ का मानना है कि तकनीक और सख्त निगरानी के मेल से ही भ्रष्टाचार को मिटाया जा सकता है। परीक्षाओं के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम और तकनीक का बेहतर इस्तेमाल इस सफलता का आधार बना।
SIT का गठन और कार्रवाई: पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ गठित SIT (Special Investigation Team) ने न केवल अपराधियों को पकड़ा, बल्कि युवाओं में यह विश्वास जगाया कि अब कोई भी उनके भविष्य से खिलवाड़ नहीं कर पाएगा।
भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस': कर्नल राठौड़ ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान अब माफियाओं की शरणस्थली नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों की कर्मस्थली है।
युवाओं का लौटा विश्वास
आज राजस्थान का युवा डरा हुआ नहीं है। उसे पता है कि अगर वह मेहनत करेगा, तो उसकी ओएमआर शीट (OMR Sheet) सुरक्षित है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है—"2 साल, 200+ परीक्षाएँ, 0 पेपर लीक"—यह लाखों परिवारों की उम्मीदों की जीत है।
निष्कर्ष: कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के नेतृत्व में राजस्थान "स्वच्छ और पारदर्शी परीक्षा" का मॉडल बनकर उभरा है, जो आने वाले समय में देश के लिए एक उदाहरण बनेगा
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