कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ - भारत का गौरव, और मेजर ध्यानचंद को नमन
हर साल 29 अगस्त का दिन भारतीय खेल जगत के लिए एक पवित्र दिन के रूप में मनाया जाता है। यह दिन दो असाधारण विभूतियों को समर्पित है – एक, जिन्होंने भारत को खेल के मैदान में अमर गौरव दिलाया, और दूसरे, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा के लिए खेल के मैदान को छोड़कर युद्ध के मैदान का रुख किया।
आज राष्ट्रीय खेल दिवस है, जो हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी की जयंती पर मनाया जाता है। उनकी स्टिक से निकलने वाला जादू आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और उनकी जयंती पर हम सभी का उन्हें कोटि-कोटि नमन है। उनका जीवन अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति की मिसाल है।
और जब हम देशभक्ति और खेल का जिक्र करते हैं, तो एक और नाम दिमाग में आता है – कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़। वह सिर्फ एक ओलंपिक पदक विजेता नहीं हैं; वह एक सच्चे भारतीय सैनिक हैं। उन्होंने दोहरी मिसाल कायम की है। एक तरफ, उन्होंने एथेंस ओलंपिक 2004 में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया, तो वहीं दूसरी ओर, सेना में एक अधिकारी के रूप में उन्होंने देश की सुरक्षा में अपना योगदान दिया।
कर्नल राठौड़ का जीवन आधुनिक भारत के युवाओं के लिए एक जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति अपने जुनून (शूटिंग) और अपने कर्तव्य (देश की सेवा) के बीच एक आदर्श संतुलन बना सकता है। वह विश्व में भारत का गौरव बढ़ाने वाले एक सच्चे नायक हैं।
आज का दिन हमें इन दोनों महान आत्माओं से प्रेरणा लेने का है। मेजर ध्यानचंद के अनुशासन और कर्नल राठौड़ के समर्पण से सीख लेकर हम अपने जीवन में नई ऊँचाइयाँ छू सकते हैं।
आइए, इस राष्ट्रीय खेल दिवस पर हम खेल के प्रति अपने समर्पण को नए सिरे से याद करें और देश के लिए कुछ कर गुजरने का संकल्प लें।
सभी पाठकों को राष्ट्रीय खेल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! जय हिन्द!
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